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फ़ूड बिल‌ में ताख़ीर पर एन ए सी अरकान का एतराज़

नई दिल्ली 21 मार्च (पी टी आई) फ़ूड बिल‌ को नज़रसानी करने के बाद हुकूमत की मंज़ूरी मिल सकती है और तवक़्क़ो है कि इस हफ़्ते इस बिल को पार्लीमेंट में पेश किया जाएगा लेकिन क़ौमी मुशावरती कौंसल की एक रुकन ने इस बिल की मंज़ूरी में दो साल से जारी

नई दिल्ली 21 मार्च (पी टी आई) फ़ूड बिल‌ को नज़रसानी करने के बाद हुकूमत की मंज़ूरी मिल सकती है और तवक़्क़ो है कि इस हफ़्ते इस बिल को पार्लीमेंट में पेश किया जाएगा लेकिन क़ौमी मुशावरती कौंसल की एक रुकन ने इस बिल की मंज़ूरी में दो साल से जारी ताख़ीर पर तन्क़ीद की और कहा कि आज के अहम तरीन हालात में इस बिल को पालिसी मसाइल से निमटने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

अगर ये बिल क़बल अज़वक़्त ही मंज़ूर करलिया जाता तो ठीक होता लेकिन उसको रूबा अमल लाने में अब रुकावटें खड़ी होगई हैं। बिल को सब से पहले 2011-ए-में पार्लीमेंट में पेश किया गया। एन ए सी के रुकन एन सी सक्सेना ने कहा कि मुझे ये कहते हुए अफ़सोस होता है कि दो साल के इंतेज़ार के बाद भी बिल पेश नहीं किया गया।

नेशनल एडवाइज़री कोंसल मुल्क के पालिसी मसाइल पर तजावीज़ पेश करने वाला इदारा है। इस ने फ़ूड बिल‌ की तैय्यारी में अहम तआवुन किया है। मुल्क की आबादी का 67 फ़ीसद हिस्सा माहाना 5 किलो अनाज हासिल करने का हक़ रखता है। और ये अनाज एकता तीन रुपय फ़ी किलोग्राम सब्सीडी शरह पर फ़राहम किया जाना है।

हुकूमत इस बिल को पार्लीमेंट के जारीये सेशन में मंज़ूर कराने का इरादा रखती है। लेकिन ये सेशन 10 मई को ख़त्म होरहा है अगर इस से पहले बिल मंज़ूर करलिया जाये तो कई मआशी मसाइल हल किए जा सकते हैं। एन सी सक्सेना जिन्हें फ़ूड‌ कमिशनर की हैसियत से सुप्रीम कोर्ट ने मुक़र्रर किया है और फ़ूड‌ से मुताल्लिक़ मसाइल पर ग़ौर-ओ-ख़ौज़ करने की ज़िम्मेदारी है, कहना है कि मौजूदा शक्ल में ये बिल मुख़्तलिफ़ है।

क्योंकि एन ए सी ने जो तजावीज़ रखी थीं उसको शामिल नही किया गया। मुल्क में फ़ाक़ाकशी से निमटने की राह में हाइल मुख़्तलिफ़ रुकावटें को दूर करने के लिए हम ने कई तजावीज़ रखी थीं लेकिन फ़ूड बिल में इसे शामिल नहीं किया गया।

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