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फ़ौजी सरबराह के दौरा को सयासी रंग देने टी आर एस की कोशिश

कोई पार्टी या शख़्स अगर किसी मसला में ग़र्क़ हो जाए तो हर चीज़ को वो उसी नज़रिया से देखता है या फिर अगर यूं कहें तो ग़लत ना होगा कि जिस रंग की ऐनक लगाई जाए हर चीज़ उसी रंग में नज़र आती है। तेलंगाना राष़्ट्रा समीती और इस के तर्जुमान अ

कोई पार्टी या शख़्स अगर किसी मसला में ग़र्क़ हो जाए तो हर चीज़ को वो उसी नज़रिया से देखता है या फिर अगर यूं कहें तो ग़लत ना होगा कि जिस रंग की ऐनक लगाई जाए हर चीज़ उसी रंग में नज़र आती है। तेलंगाना राष़्ट्रा समीती और इस के तर्जुमान अख्बार नमस्ते तेलंगाना को हर मुआमला अलहदा तेलंगाना की तशकील से मुताल्लिक़ नज़र आता है।

हिंदुस्तान के फ़ौजी सरबराह की हैसियत से जायज़ा लेने के बाद जनरल विक्रम सिंह आज जब पहली मर्तबा हैदराबाद आए तो उन्हों ने गवर्नर और चीफ़ मिनिस्टर से ख़ैरसगाली मुलाक़ात की और फ़ौज से मुताल्लिक़ बाअज़ उमूर पर तबादला-ए-ख़्याल किया लेकिन इस मुलाक़ात को टी आर एस के तर्जुमान अख्बार ने तेलंगाना की तशकील से जोड़ दिया।

अख्बार ने अपनी वेबसाइट पर जो ख़बर पेश की है उसे देख कर सयासी क़ाइदीन और ख़ुद तेलंगाना राष़्ट्रा समीती के क़ाइदीन और कारकुन हैरत में पड़ गए । अख्बार ने मुसद्दिक़ा इत्तिला के हवाला से दावा किया कि मर्कज़ ने पाँच बर्सों तक हैदराबाद को तेलंगाना और सीमा आंधरा रियास्तों का मुशतर्का दार-उल-हकूमत रखने का फ़ैसला किया है।

दिलचस्प बात तो ये है कि फ़ौजी सरबराह की चीफ़ मिनिस्टर से मुलाक़ात के बाद चीफ़ मिनिस्टर के दफ़्तर ने जो तफ़सीलात जारी कीं उस में फ़ौज और फ़ौजीयों से मुताल्लिक़ उमूर पर नुमाइंदगी का ही तज़किरा है। इस के इलावा किसी और ज़ुबान के अख्बार ने इस मुलाक़ात को तेलंगाना मसला से मरबूत करने की कोशिश नहीं की। सयासी मुबस्सिरीन के मुताबिक़ अगर मर्कज़ अलहदा रियासत की तशकील का फ़ैसला करले तब भी फ़ौजी मुदाख़िलत का सवाल ही पैदा नहीं होता। फिर मर्कज़ी हुकूमत क्यों फ़ौजी सरबराह को हैदराबाद रवाना करेगी।

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