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फाइलों की गुमशुदगी के लिए बंदर ज़िम्मेदार?

राज्य सभा में आज बंदर के ज़िक्र ने वहां मौजूद अरकान को क़हक़ा लगाने पर मजबूर करदिया जहां एक कांग्रेसी रुक्न ने बाज़ अहम फाइलों की गुमशुदगी के लिए बंदरों को ज़िम्मेदार क़रार दिया था।

राज्य सभा में आज बंदर के ज़िक्र ने वहां मौजूद अरकान को क़हक़ा लगाने पर मजबूर करदिया जहां एक कांग्रेसी रुक्न ने बाज़ अहम फाइलों की गुमशुदगी के लिए बंदरों को ज़िम्मेदार क़रार दिया था।

यहां इस बात का तज़किरा दिलचस्प होगा कि ऐवान में वज़ारत-ए-दाख़िला की 11,100 फाइलों की पुर इसरार गुमशुदगी के मौज़ू पर संजीदा मुबाहिसा होरहा था जब कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने सूरत-ए-हाल की मुज़म्मत करते हुए कहा कि हालात इतने ख़राब हैं कि फाइलों को इमारत की राहदारी (कॉरीडोर) में रखा जाता है जहां बंदरों का बोल बाला है।

उन्होंने मज़ीद कहा कि मज़े की बात ये है कि मौजूदा हुकूमत में एक वज़ीर ऐसे हैं जो बंदरों के ख़िलाफ़ किसी भी कार्रवाई के मुख़ालिफ़ हैं। शुक्ला ने कहा कि अगर यक़ीन ना आए तो मनमोहन सिंह जी से पूछ लीजिए कि जिस वक़्त मौसूफ़ वज़ीर मालियात थे उस वक़्त कॉरीडोर से गुज़रना कितना मुश्किल था।

ये बात सुन कर अपोज़ीशन बेंचों पर बैठे हुए मनमोहन सिंह भी अपनी मुस्कुराहट रोक ना सके। शुक्ला ने कहा कि ये एक आम बात बन गई है कि किसी भी फाईल के खोजाने का इल्ज़ाम बंदरों पर आइद करदिया जाता है और हुकूमत से अपील की कि फाइलों के तहफ़्फ़ुज़ के लिए मूसिर इक़दामात किए जाएं।

उन्होंने कहा कि सूरत-ए-हाल के बद से बदतर होने का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि हुकूमत ने बंदरों की हड़बोंग पर क़ाबू पाने के लिए लंगूरों की ख़िदमात हासिल की हैं जिस पर ऐवान में क़हक़हे बुलंद हुए।

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