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फिल्म कलाकार, क्रिकेटर, प्रोफेसर, अधिकारी सब को मिल रही है पचास हज़ार पेंशन.

फैसल फरीद
लखनऊ

क्या आप जानते हैं की मशहूर बॉलीवुड कलाकार राज बब्बर, अभिजीत भट्टाचार्य,समीर, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी , कैलाश खेर, मुज़फ्फर अली, सुधीर मिश्र, राजू श्रीवास्तव, अनुराग कश्यप, विशाल भरद्वाज, क्रिकेटर मोहम्मद कैफ, सुरेश रैना, कलाकार सजन राजन बंधू, अनूप जलोटा, नादिरा बब्बर, शुभा मुदगल, गिरिजा देवी, बिरजू महाराज, कवी गोपालदास नीरज, अशोक चक्रधर, सुनील जोगी, विक्रम सेठ, गोपाल चतुर्वेदी, यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एस एस कटियार, जे एस राजपूत, इरफ़ान हबीब, राज बिसारिया, डॉ सरोज चूरामणि गोपाल, और रविकांत. इसके अलावा आई ए एस अधिकारियो की पत्नी जैसे सुरभि रंजन, मालिनी अवस्थी, आई पी एस अधिकारी अपर्णा कुमार और अन्य संपन्न लोग जैसे रुना बनर्जी, स्कूल चैन के मालिक जगदीश गाँधी और पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा में क्या समानताये हैं.

इन सभी लोगो को उत्तर प्रदेश सरकार हर महीने पचास हज़ार पेंशन दे रही हैं. ऐसा नहीं है कि ये लोग अपनी आर्थिक स्थ्तित के लिए पेंशन ले रहे हैं बल्कि सरकार की योजना जिसमे यश भारती और पदम् पुरस्कारों से सम्मानित महानुभावो को हर महीने पचास हज़ार पेंशन देने का प्रावधान हैं.

ये सभी लोग यश भारती या फिर पदम् पुरस्कार से सम्मानित हैं. ऐसे में पेंशन के हक़दार भी हैं. नियम के अनुसार कुछ गलत नहीं लगता लेकिन वहीँ दूसरी ओर प्रदेश में पेंशन गरीबो को बहुत कम पेंशन मिलती हैं. सरकार की महत्वपूर्ण योजना समाजवादी पेंशन स्कीम के तहत मात्र पांच सौ रुपये महीने गरीबो को पेंशन दी जाती हैं. दूसरी ओर वृधावस्था पेंशन की राशि मात्र तीन सौ रुपये हर महीने हैं.

ये बात सही हैं की कुछ कलाकारों को विषम आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ता हैं. ऐसे में वो पेंशन के हक़दार हैं. राज्य की ज़िम्मेदारी भी हैं की ऐसे लोगो का वो सम्मान करें. लेकिन आर्थिक रूप से संपन्न कलाकारों को पेंशन देना समझ नहीं आता हैं.

इस पचास हज़ार मासिक पेंशन के नियम भी हैं. कलाकार को खुद फॉर्म भरना पड़ता हैं कि वो पेंशन अपने लिए ले रहे हैं.

ज़ाहिर से बात हैं इन महान हस्तियों ने फॉर्म भी भरे होंगे उसके बाद पेंशन स्वीकृत हुई.
प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग ने ये सूची अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दी हैं और कोई भी देख सकता हैं.22 फरवरी 2016 तक अब तक 174 लोगो को पेंशन दी जा रही हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता नूतन ठाकुर इस भारी भरकम पेंशन को गरीबी का उपहास बताती हैं और अदालत में याचिका दायर करने की भी बात करती हैं. उनके अनुसार संपन्न लोगो को पेंशन देना वाकई में अजीबोगरीब हैं. ध्यान रहे यश भारती पुरस्कार में 11 लाख रुपये की धनराशी भी दी जाती है और ये पुरस्कार देने की परंपरा मुलायम सिंह यादव ने अपने कार्यकाल में शुरू की थी.

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