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फिल्म दंगल की कहानी से मिलती-जुलती कहानी, सैनविच बेचने वाली मां-बेटी बनीं चैंपियन पावरलिफ्टर

नवी मुंबई : सैनविच बेचने वाली एक महिला ने अपनी 17 साल की बेटी को राज्य स्तर का पावरलिफ्टर बनाया। संगीता उर्फ ज्योतिका पाटेकर (48) खुद 1984 में पावरलिफ्टिंग खेल में भाग ले चुकी हैं। वह मुंबई के उन लड़कियों के सबसे पहले समूह का हिस्सा हैं जिन्होंने पावरलिफ्टिंग को अपनाया। शादी के बाद 1990 में उन्होंने पावरलिफ्टिंग छोड़ दी और मनगांव के गोरेगांव इलाके में शिफ्ट हो गईं। अभी तक गुजारे के लिए वह अपने पति के साथ सैनविच बेचने का काम करती हैं।

ज्योतिका कहती हैं, ‘शादी के बाद मैं अकसर मुंबई के अपने स्कूल के दिनों को याद किया करती थी। उस समय मैं पावरलिफ्टिंग में बहुत अच्छी थी। चैम्बूर हाई स्कूल के मेरे स्पोर्ट्स टीचर मधुकर दारेकर ने मुझे 1984-85 में पावरलिफ्टिंग के लिए प्रेरित किया। तो जब हाल ही में मेरी बेटी वैभवी ने पावरलिफ्टिंग मे प्रति आकर्षण दिखाया तो मैंने उसके साथ वही किया जो मेरे स्पोर्ट्स टीचर ने मेरे साथ किया था।’

तीन महीने पहले ज्योतिका ने रात के समय अपनी बेटी वैभवी को एक स्थानीय जिम में पावरलिफ्टिंग की बुनियादी ट्रेनिंग देनी शुरू की। इसमें स्क्वेट, बेंच प्रेस और डेडलिफ्ट शामिल थे। दिन में वह अपने पति के साथ काम करती थीं। उनकी बेटी, जो इस समय 12वीं की छात्रा है, पढ़ाई करतीं। पिछले साल जिले स्तर पर हुई प्रतियोगिता में उसने पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद मुंबई डिविजन में भी उसने अच्छा किया और जलगांव में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए क्वॉलिफाइ किया। दिसंबर में हुई इस प्रतियोगिता में उसने चौथा स्थान हासिल किया।

उसकी खुशी तब और बढ़ गई जब उसकी मां ने जलगांव में ओपन कैटिगरी भाग लिया और गोल्ड मेडल जीता। वैभवी कहती हैं कि मैंने पावरलिफ्टिंग से जुड़ी मां की कहानियां सुनने के बाद ही इस खेल को चुना। मुझे इस बात की दोगुनी खुशी है कि मैं राज्य स्तर तक पहुंच गई हूं। उनका खेल की लौटने का सपना पूरा हो गया है।’

स्थानीय लोगों ने मां-बेटी की इस जोड़ी को ‘दंगल टीम’ कहकर पुकारना शुरू कर दिया है। वैभवी का कॉलेज उनकी उपलब्धियों पर काफी खुश है। उसके स्पोर्ट्स टीचर जीबी माणे और एक हेस ने कहा कि कॉलेज के चेयरमैन दिलीपभाई सेठ ने छात्रों को हमेशा ऐथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो और वॉलिबाल आदि को प्रोत्साहित किया है। मां-बेटी के इस समूह को कई सेवा-समूह मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं।

ज्योतिका के पति जयंत पाटेकर कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण अपनी बेटी को इस खेल में भेजने के पक्ष में नहीं थे। पर आज जब वह उसकी उपलब्धियों को देखते हैं तो गर्व से भर जाते हैं। ज्योतिका कहती हैं, ‘मेरा सपना है कि मनगांव में एक स्तरीय ट्रेनिंग स्कूल खोलूं जिसमें भविष्य के चैंपियन तैयार किए जा सकें। इसके लिए मुझे सरकार की मदद और फंड की जरूरत होगी।’ उसे लगता है कि ऐसा संभव हो सकता है।

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