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फिसलबंडा में 30 करोड़ रुपये मालियती 3.5 एकड़ अराज़ी पर नाजायज़ क़बज़ा!

हैदराबाद 14 फ़बरोरी: मिधानी आर टी सी बस डिपो फिसल बंडा के क़रीब वाक़ये 30 करोड़ रुपये मालियती सरकारी अराज़ी के लिए जारी करदा एन ओ सी को हुकूमत ने मंसूख़ करते हुए अपनी साबिक़ा हलीफ़ जमात को ग़ैरमामूली झटका दिया है।

हैदराबाद 14 फ़बरोरी: मिधानी आर टी सी बस डिपो फिसल बंडा के क़रीब वाक़ये 30 करोड़ रुपये मालियती सरकारी अराज़ी के लिए जारी करदा एन ओ सी को हुकूमत ने मंसूख़ करते हुए अपनी साबिक़ा हलीफ़ जमात को ग़ैरमामूली झटका दिया है।

इस सिलसिले में तेलुगु और अंग्रेज़ी अख़बारात में इस ज़मीन पर क़ाबिज़ अफ़राद के नामों के साथ तफ़सीली रिपोर्टस शाय की गई हैं। इन रिपोर्टस के मुताबिक़ एक अहम फ़ैसला करते हुए महिकमा रेवैन्यू के प्रिंसिपल सेक्रेटरी बी आर मीना ने अपने पेशरू अनील चंद्रा पूनीता के जारी करदा मुतनाज़ा हुक्मनामा को मंसूख़ कर दिया। ये हुक्मनामा फिसल बंडा हैदराबाद में वाक़्ये 3.5 एकड़ क़ीमती अराज़ी के बारे में जारी किया गया।

ताहम इस अराज़ी का हुकूमत ने हनूज़ क़बज़ा हासिल नहीं किया। बताया जाता है कि इस अराज़ी को वापिस लेने के अहकामात जारी करदिए गए। ताहम ओहदेदार अराज़ी को क़बज़े में लेने के लिए हुकूमत के अहकामात मौसूल होने का इंतेज़ार कररहे हैं। वाज़िह रहे कि 23 मार्च 2010 को उस वक़्त के कलैक्टर हैदराबाद नवीन मित्तल ने एन ओ सी जारी करते हुए 5 अफ़राद को ये क़ीमती अराज़ी हवाले करदी थी। हुज़ूर निज़ाम के रेवैन्यू सिस्टम में उसे अबादी अराज़ी कहा जाता था। ये भी कहा जाता हीके नवीन मित्तल ने मज़कूरा अफ़राद को अराज़ी हवाले करने से क़बल उस की मिल्कियत के दाववें की तसदीक़ करना भी गवारा नहीं किया।

ताहम बाअज़ तंज़ीमों बिशमोल सी पी एम की तरफ से इस अराज़ी की मुंतक़ली के बारे में शकूक-ओ-शुबहात ज़ाहिर किए जाने और शिकायत दर्ज करवाने पर उस वक़्त के चीफ़ कमिशनर लैंड एडमिनिस्ट्रेशन ने पहले एस एन ओ सी को अलतवा में रखा और फिर तहक़ीक़ात का हुक्म दिया, जिस पर पता चला कि ये सरकारी अराज़ी है और किसी को भी इस पर क़बज़ा की इजाज़त नहीं दी गई और ना ही कोई हुक्म जारी किया गया।

चुनांचे इस रिपोर्ट की बुनियाद पर 18 जून 2012 को सी सी एलए मैनी मैथीयू ने एन ओ सी को मंसूख़ कर दिया, लेकिन सयासी दबाव‌ में आकर रेवैन्यू सेक्रेटरी अनील चंद्रा योनीता ने सी सी एलए के जारी करदा अहकामात पर हुक्म अलतवा जारी किया और नोटिस जारी की, जिस में मनी मीथो के इस इक़दाम पर सवाल उठाए और कहा कि एक एसे वक़्त जबके हुकूमत फाईल का जायज़ा ले रही हो वो किस तरह मुतवाज़ी फ़ैसला करसकती हैं। इस वजह बताव‌ नोटिस को इस लिए एहमीयत नहीं दी गई क्योंके ये नोटिस एक जूनियर ऑफीसर ने अपने सीनीयर ओहदेदार को जारी की थी।

इस अराज़ी को मंज़र-ए-आम पर लाने में साबिक़ कलैक्टर हैदराबाद नटराजन गुलज़ार का अहम रोल रहा। बहरहाल अराज़ी फिर एक बार हुकूमत की मिल्कियत बिन गई है और इस तरह सयासी अफ़राद को अचानक 30 करोड़ रुपये का झटका लग गया।

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