Wednesday , September 20 2017
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फोर्ब्स के एडिटर ने नोटबंदी को बताया अनैतिक, नस बंदी से की तुलना

नई दिल्ली: अमेरिका की प्रतिष्ठित फोर्ब्स मीडिया के एडिटर इन चीफ स्टीव फोर्ब्स ने मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले की तीखी आलोचना की है. स्टीव फोर्ब्स ने नोटबंदी के फैसले को अनैतिक बताते हुए इसे जनता के पैसे पर डाका कहा है. साथ ही उन्होंने इस फैसले की तुलना 1970 के दशक के ‘जबरन नसबंदी’ कार्यक्रम से भी की है.

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नव भारत टाइम्स के अनुसार, स्टीव फोर्ब्स ने नोटबंदी के फैसले पर संपादकीय लिखा है. यह संपादकीय 24 जनवरी 2017 को मैगजीन के प्रिंट इशू में पढ़ने को मिलेगा. हालांकि फोर्ब्स की साइट पर यह अभी से उपलब्ध है. फोर्ब्स ने लिखा है कि मोदी सरकार ने बिना किसी चेतावनी के देश की 85 फीसदी करंसी को खत्म कर दिया. हैरान जनता को बैंकों से कैश बदलवाने के लिए महज कुछ हफ्तों का समय दिया गया.

फोर्ब्स ने फैसले से पहले की तैयारियों में हुई कमी पर भी निशाना साधा है. फोर्ब्स ने लिखा कि सरकार ने उचित मात्रा में नए नोट नहीं छापे. जो नए नोट छपे उनकी साइज में अंतर कर दिया जिससे एटीएम के साथ काफी दिक्कत हुई. फोर्ब्स ने लिखा है कि हालांकि भारत एक हाइटेक पावरहाउस है लेकिन यहां लाखों लोग अभी भी गरीब हैं.
लेख में कहा गया है कि नोटबंदी के फैसले के कारण भारतीय शहरों में काम करने वाले कामगार अपने गांवों को लौट गए हैं क्योंकि बहुत से कारोबार बंद हो रहे हैं.

फोर्ब्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था के नकद पर अत्यधिक निर्भर होने का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि यहां ज्यादातर लोग नियमों और टैक्स के अतिरेक की वजह से अनौपचारिक तरीके अपनाते हैं. आगे लिखा है कि 1970 के दशक में लागू की गई नसबंदी के बाद सरकार ने ऐसा अनैतिक फैसला नहीं लिया था.

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