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फौज़िया चौधरी ने उर्दू की तरक्की को अपनी जिंदगी का मक़सद बना लिया था: जर्नलिस्ट फौकिया वाजिद

बेंगलुरु: कर्नाटक उर्दू अकेडमी की पूर्व अधयक्ष स्वर्गीय डॉक्टर फौज़िया चौधरी की याद में शांति सम्मेलन तथा मुशायरा आयोजित हुआ। बेंगलुरु में आयोजित इस समारोह में फौज़िया चौधरी की साहित्यिक सेवाओं के साथ महिलाओं के हितों पर भी बातचीत हुई।

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न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार शहर गुलिस्तान बेंगलुरु में कर्नाटक उर्दू अकेडमी की पूर्व अध्यक्ष और प्रसिद्ध लेखिका स्वर्गीय डॉक्टर फौज़िया चौधरी की याद में समारोह आयोजित किया गया। फौज़िया चौधरी की बेटी और जर्नलिस्ट फौकिया वाजिद ने अपनी मां की साहित्यिक सेवाओं पर रोशनी डाली।फौकिया वाजिद ने कहा कि फौज़िया चौधरी ने उर्दू के विकास और अस्तित्व को अपनी जीवन का उद्देश्य बना लिया था।

इस अवसर पर महिला की हितों के विषय पर प्रवक्ताओं ने संबोधित किया। बैठक में कहा गया कि इस्लाम ने 1400 साल पहले महिलाओं को उनके अधिकार दिए हैं। लेकिन मौजूदा दौर में मुस्लिम समाज में महिलाओं के हितों को दबाने की कोशिशें हो रही हैं और इसीलिए मुस्लिम समाज में महिलाओं के अधिकारों पर उंगलियां उठाई जा रही हैं।

प्रसिद्ध विद्वान सैयद शफी उल्लाह और प्रसिद्ध विद्वान डॉक्टर हरमिंदर सिंह ने कहा कि महिलाओं की उच्च शिक्षा को सुनिश्चित बनाया जाए। कर्नाटक उर्दू अकेडमी और आईएमए के सहयोग से नेशनल पीस मेकर्स फाउंडेशन के तहत यह समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर आयोजित विश्व मुशायरा में देश और विदेश के शायरों ने भाग लिया।

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