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बंद कमरे में होगी इस्मतरेज़ि की सुनवाई

नई दिल्ली, 08 जनवरी: दिल्ली की अदालत में जहां 16 दिसंबर के इजतिमाई इस्मत रेज़ि‍ ओ‍ क़त्ल मुक़द्दमा की आज समाअत हुई है कार्रवाई शुरू होने से क़बल ही ड्रामाई मुनाज़िर देखे गए जहां एक वकील ने मुल्ज़िमीन का दिफ़ा शुरू कर दिया और अहाता अदालत मे

नई दिल्ली, 08 जनवरी: दिल्ली की अदालत में जहां 16 दिसंबर के इजतिमाई इस्मत रेज़ि‍ ओ‍ क़त्ल मुक़द्दमा की आज समाअत हुई है कार्रवाई शुरू होने से क़बल ही ड्रामाई मुनाज़िर देखे गए जहां एक वकील ने मुल्ज़िमीन का दिफ़ा शुरू कर दिया और अहाता अदालत में मौजूद वुकला ने इस पर शदीद एतराज़ किया ।

ऐसा पहली मर्तबा हो रहा है कि एक वकील इन पाँच मुल्ज़िमीन के दिफ़ा के लिए आगे आया है । एडवोकेट मनोहर लाल शर्मा ने दावा किया है कि मुल्ज़िमीन के अरकान ख़ानदान से इसका राबिता क़ायम हुआ और उन्होंने मुक़द्दमा में मुल्ज़िमीन के दिफ़ा की ख़ाहिश की है चुनांचे वो इन पाँच मुल्ज़िमीन के दिफ़ा के लिए तैयार है ।

लेकिन अहाता अदालत में मौजूद दीगर वुकला ने मनोहर लाल शर्मा को ख़बरदार किया कि वो पाँच मुल्ज़िमीन की सफ़ाई पेश करने की कोशिश ना करे क्योंकि वो इंतिहाई बदतरीन जुर्म में मुलव्वस हैं । मुल्ज़िमीन की आमद के इंतेज़ार में कई वुकला और ज़राए इबलाग़ के नुमाइंदे मेट्रो पोलिटीन मजिस्ट्रेट नम्रता अग्रवाल की अदालत में मुक़र्ररा वक़्त से पहले ही पहुंच गए थे ।

अहाता अदालत में पुलिस भी मौजूद थी ताकि हुजूम को क़ाबू में रखा जा सके और कोई इमकानी वाक़िया पेश ना आए । जैसे ही मुल्ज़िमीन को कमरा अदालत के क़रीब लाया गया और पुलिस ने वहां मौजूद अवाम से रास्ता देने की ख़ाहिश की तब अवाम भड़क उठे और कहा कि अदालत में अवाम और वुकला से ज़्यादा पुलिस मौजूद है ।

इस दौरान जज ने अहाता अदालत में दाख़िल होते ही एडवोकेट्स और अवाम से ख़ाहिश की कि वो मुल्ज़िमीन को पेश करने के लिए रास्ता दें लेकिन अदालत में मौजूद अवाम ने ऐसा करने से इनकार कर दिया और जज से ख़ाहिश की कि उन्हें इसी तरह अदालत में लाया जाये ताकि वो इन मुल्ज़िमीन का चेहरा देख सके।

बादअज़ां बंद कमरे में मुक़द्दमा की समाअत शुरू हुई और इस केस के पाँच मुल्ज़िमीन को अदालत में पेश किया गया । मेट्रो पोलीटन मजिस्ट्रेट नम्रता अग्रवाल ने मीडिया को इस केस की समाअत की रिपोर्टिंग करने और इशाअत से भी रोक दिया । दिल्ली पुलिस ने अदालत में दरख़ास्त दायर करते हुए मुक़द्दमा की बंद कमरे में समाअत की ख़ाहिश की थी ।

अपने हुक्मनामा में कहा कि इस वाक़िया से पैदा शूदा सूरत-ए-हाल को ज़हन में रखते हुए इस केस में तमाम कार्रवाई बिशमोल तहकीकात और मुक़द्दमा की समाअत बंद कमरे में होगी । जज ने ताज़ीरात ए हिंद की दफ़ा 327( 2) ( iii ) का लागू कर दिया और हुक्म दिया कि अदालत में जितने भी लोग मौजूद हैं वह फ़ौरी कमरा अदालत से बाहर चले जाएं।

जज ने मज़ीद कहा कि इस केस की पेशरफ़्त से मुताल्लिक़ कोई भी मवाद अदालत की इजाज़त के बगैर शाय नहीं किया जाना चाहीए । इस हुक्मनामा को चैलेंज करते हुए कुछ वुकला ने ज़िला जज आर के गुप्ता की अदालत में दरख़ास्त दायर की और कहा कि मीडिया पर आइद पाबंदी को बरख़ास्त किया जाना चाहीए ।

ज़िला जज आर के गोबा ने इस दरख़ास्त पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी की और मुआमला की समाअत 9 जनवरी को मुक़र्रर की है । पब्लिक प्रॉसिक्यूटर राजीव मोहन ने एक दरख़ास्त पेश करते हुए अदालत से ख़ाहिश की थी कि बंद कमरे में मुक़द्दमा की समाअत की जाये ।

दिल्ली पुलिस ने दो दिन क़बल ही एक सर्कुलर जारी करते हुए कह दिया था कि इस केस की कार्रवाई की रिपोर्टिंग नहीं की जानी चाहीए क्योंकि अदालत ने पहले ही चार्जशीट क़बूल कर ली है । चार्जशीट में इस्मत रेज़ि और क़त्ल के दफ़आत लागू किए गए हैं। अदालत ने पुलिस की दरख़ास्त को कुबूल करते हुए कहा कि इस केस में एक ग़ैरमामूली सूरत-ए-हाल पैदा हुई है जहां बार कौंसल के अरकान और अवामी अफ़राद ने जिनका केस से कोई ताल्लुक़ नहीं है कमरा अदालत में जमा हो गए और कमरा अदालत में हुजूम जमा हो गया है जिससे मुक़द्दमा की समाअत मुश्किल होगी ।

जज ने कहा कि जो अफ़राद जमा हुए हैं इनका केस से कोई ताल्लुक़ नहीं है और उन्हें अदालत के बाहर जाने की हिदायत भी दी गई थी । ये लोग कमरा अदालत से बाहर जाने को तैयार नहीं थे जबकि कमरा अदालत में तिल धरने को जगह नहीं थी । अदालत ने कहा कि ऐसे में मुल्ज़िमीन को तहवील से अदालत में पेश नहीं किया जा सकेगा ।

मुल्ज़िमीन को सेंटर्ल जेल तिहाड़ से अदालत को लाया गया था । ताहम बाद में पाँच मुल्ज़िमीन को अदालत में पेश किया गया जहां आइन्दा समाअत 10 जनवरी को मुक़र्रर कर दी गई जब तमाम दस्तावेज़ात की तन्क़ीह की जाएगी । क़बल अज़ीं जज ने कहा था कि साकेत कोर्ट काप्पलेक्स लॉक अप इंचार्ज ने कहा कि वो मुल्ज़िम को महफ़ूज़ रास्ता ना होने पर कमरा अदालत में लाने से क़ासिर है ।

इस दौरान चीफ जस्टिस आफ़ इंडिया जस्टिस अल्तमिश कबीर ने कहा कि बहीमाना इजतिमाई इस्मत रेज़ि और क़त्ल के वाक़िया से क़ौम का ज़मीर मुतज़लज़ल हो गया है । उन्होंने तमाम हाइकोर्ट्स से कहा है कि वो ख़वातीन पर मज़ालिम के मुक़द्दमात की समाअत के लिए फ़ास्ट ट्रैक अदालतें क़ायम करें।

चीफ जस्टिस ने तमाम हाइकोर्टस के चीफ जस्टिसों को एक मकतूब रवाना करते हुए कहा कि इस तरह के मुआमलात की यकसूई में ताख़ीर से ख़वातीन के ख़िलाफ़ जराइम में इज़ाफ़ा हो सकता है । इसलिए अब वक़्त आ गया है कि इस तरह के मुआमलात की तेज़ी के साथ यकसूई की जाये ।

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