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बच्चे की तर्बियत में मां बाप का अहम रोल

बच्चा जिंदगी में सही सिम्त में आगे बढ़े, उसे गलत और सही की समझ हो और इन सबके बाद वह जिंदगी में सही फैसला ले और कामयाबी की मंजिले तय करता चला जाए यह तमाम ख्वाहिशे वाल्दैन की होती है। लेकिन सिर्फ ख्वाहिशे रखने से ही बच्चा इन तमाम खूबिय

बच्चा जिंदगी में सही सिम्त में आगे बढ़े, उसे गलत और सही की समझ हो और इन सबके बाद वह जिंदगी में सही फैसला ले और कामयाबी की मंजिले तय करता चला जाए यह तमाम ख्वाहिशे वाल्दैन की होती है। लेकिन सिर्फ ख्वाहिशे रखने से ही बच्चा इन तमाम खूबियों का हामिल नहीं हो सकता जब तक कि वाल्दैन भी अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से अंजाम न दें।

क्योंकि बच्चे की तालीम व तर्बियत में सबसे बड़ा रोल तो वाल्दैन का ही होता है। बच्चे को सही काम के लिए रागिब करना वाल्दैन की ही जिम्मेदारी है। बच्चे की किसी गलत हरकत की तंकीद सिर्फ इसलिए नहीं की जानी चाहिए कि उसे सही बात बताना है। बात करते वक्त उन अल्फाज या जुमलों का इस्तेमाल करें जो बच्चे को हौसला दे। बच्चे स्कूल में क्या करते हैं, उनके दोस्त उन्हें क्या कहते हैं, पड़ोस के बच्चों के साथ उसे खेलना क्या अच्छा लगता है, यह तमाम बातें आपको उसके मिजाज को समझने में मदद करेंगी।

अगर बच्चा फौरन आपकी बात नहीं मान रहा है तो हौसला न हारें। उस वक्त बात को छोड़कर फिर बाद में नए तरीके से उसे मिसाल देकर सही बात के लिए रागिब करें। आप अपने बच्चे के सामने मिसाली किरदार अदा करें। क्योंकि बच्चा जैसा आप को देखता है उसी तरह का होने की कोशिश करता है। अगर आप का रवैया और हरकतें सही है तो बच्चा भी उन्हीं रवैयों और हरकतों को अपनाएगा। अगर आप झूट बोलती है साथ ही बच्चे से भी कभी-कभी झूट बोलने के लिए कहती हैं यकीनन यह आदत बच्चे में मजबूती पकड़ती जाएगी और आगे चलकर आप चाहेंगी कि यह आदत बच्चे से चली जाए तो यह काम आपके लिए बहुत मुश्किल हो जाएगा। इसलिए आप बच्चे के सामने ऐसी बातें या हरकतें न करें जिनसे बच्चे की तर्बियत पर मनफी असर पड़ता हों।

बच्चों की पसंद और नापसंद को भी समझे। मतलब आप वह सब समझे जो आपके बच्चे के मन में चल रहा है। हो सकता है वह किसी पर नाराज हो या फिर परेशान। अब ऐसे में डांटकर यह कहना कि बच्चा ही तो है ऐसी बाते इसको नहीं सोंचनी चाहिए यह गलत होगा। आपको उनके एहसासात की कद्र भी करनी चाहिए। आपको उसका मूड बदलने की कोशिश जरूर करनी चाहिए। बच्चे के मूड के पीछे कोई वजह भी हो सकती है। उससे प्यार से बात करें। बच्चा जिस चीज में दिलचस्पी लेता है उसमें आप भी दिलचस्पी लेना शुरू करें। फिर चाहे वह स्पोर्ट्स् पसंद करे या पढ़ाई। अगर आपकी दिलचस्पी उसमें न भी हो तो भी उसके सामने यही एहसास दिलाएं कि आप की भी दिलचस्पी उसमें है।

यह काम आपको बच्चे की जिंदगी से जोड़ता है। ऐसा करना उसे पसंदीदा काम करते रहने के लिए रागिब करता है। बच्चे को यह एहसास न हो कि वह अकेला है। इसलिए बच्चे के लिए ज्यादा से ज्यादा वक्त निकाल कर उसके साथ ही गुजारें।

——-बशुक्रिया: जदीद मरकज़

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