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बच्चों की फीस देने के लिए नही था कैश तो किसानों ने स्कूल को कहा,” पैसों की जगह धान ले लो”

मध्यप्रदेश: नोटबंदी के चलते पैसे न होने के कारण ग्वालियर में एक किसान ने अपने बच्चों की स्कूल की फीस नहीं दे पा रहे थे। गधौटा गांव के इस किसान के बच्चे इलाके में स्थित एमएलबी प्राइमरी स्कूल में पढ़ते हैं। जहाँ 35 बच्चों की कई माह की फीस बकाया थी। उनका कहना था कि नए नोट न होने के कारण वह फीस नहीं दे पा रहे हैं। इस लिए उन्होंने स्कूल प्रशासन से उन्हें धान देकर पैसे चुकाने की बात कही जिसे स्कूल की तरफ से भी स्वीकार कर लिया गया। जिसके चलते उन्होंने फीस के तौर पर 45 क्विंटल धान स्कूल में जमा कराया और स्कूल वालों ने उसे मंडी में बेचकर 58,500 रुपये का चेक प्राप्त कर लिया।

स्कूल के डायरेक्टर ने बताया कि मंडी में धान बेचने पर इन किसानों को कैश नहीं बल्कि चेक मिल रहा था। लेकिन इनमें से कई किसानों के पास बैंक खाते भी नहीं थे। इसलिए उन्होंने हमें धान दी जिसे हमने ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर मंडी में बेच और वहां से चेक लिया। किसानों और स्कूल वालों के इस कदम की हर तरफ काफी सराहना की जा रही है।

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