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बच्चों के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों में देश में दूसरे नंबर पर BJP शासित मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश को विकसित राज्य बनाने का दावा करने वाले शिवराज सिंह चौहान शायद प्रदेश में बढ़ते अपराध पर आंखें बंद कर लेते हैं । मध्यप्रदेश के हालात ये हैं कि विकास में पिछड़ने के बाद प्रदेश आपराधिक गतिविधियों में अव्वल आता जा रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने भाषणों में प्रदेश के विकास का बखान करते है लेकिन आंकड़े कुछ और बयां कर रहे है।

रेप के मामलों में देश के सभी राज्यों को पछाड़ मध्यप्रदेश पहले ही नंबर वन का स्थान प्राप्त कर चुका है। अब बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराध में मप्र, देश में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।

इतना ही नहीं बाल विवाह के मामले में भी प्रदेश ने 8वां स्थान ग्रहण कर लिया है। वहीं इन मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा के स्तर में सुधार न होने के कारण यह स्थिति बन रही है।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चाइल्ड राइट्स ऑब्जरवेटरी मप्र की रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के विरुद्ध अपराध के मामले में मप्र का देश में दूसरा स्थान है। प्रदेश में बच्चों पर कुल 12,859 प्रकरण दर्ज हैं।

वर्ष-2015 के दौरान अपहरण के 5,306 ज्यादती के 1,568 और हत्या के 124 मामले दर्ज किए गए। वर्ष-2015 में रेप की 391 घटनाएं हुईं। इनमें 35.7 प्रतिशत रेप की घटनाएं बच्चों के साथ हुईं। इसी साल अपहरण की 6778 घटनाएं हुईं, जिसमें से 78.28 फीसदी बच्चों के साथ की गईं।

सर्वेक्षण के अनुसार जिन जिलों में शहरी आबादी का प्रतिशत ज्यादा है अथवा जिन जिलों की सीमाएं बड़े शहरों से लगी हुई हैं, वहां बच्चों के साथ अपराध के मामले ज्यादा घटित हुए हैं।

इसके अलावा मध्यप्रदेश के 3.45% स्कूलों में अब भी टॉयलेट नहीं हैं । इस मामले में मप्र देश में 30वें स्थान पर है। प्रदेश के सिर्फ़ 28.8% स्कूलों में ही बिजली कनेक्शन हैं और इस तरह प्रदेश देश में 33वें पायदान पर है।

मप्र के 84.83% स्कूलों में कंप्यूटर नहीं हैं। देश में इस मामले प्रदेश का 28वां स्थान । मध्यप्रदेश के स्कूलों की बदहाली का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के 55.11 फीसदी स्कूलों में बाउंड्रीवॉल तक नहीं हैं।

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