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बच्चों के साथ इंसाफ़ क़ानून का जायज़ा

नई दिल्ली. 4. फरवरी (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला किया है कि बच्चों के साथ इंसाफ़ क़ानून में बच्चों जो तारीफ़ फ़राहम की गई है, इन शराइत के आईनी तौर पर कारआमद होने का जायज़ा लिया जाएगा.

नई दिल्ली. 4. फरवरी (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला किया है कि बच्चों के साथ इंसाफ़ क़ानून में बच्चों जो तारीफ़ फ़राहम की गई है, इन शराइत के आईनी तौर पर कारआमद होने का जायज़ा लिया जाएगा. इन शराइत के तहत किसी भी शख़्स को 18 साल की उम्र होने तक नाबालिग़ क़रार दिया जाता है।

इस मसले के लिए नुमाया एहमीयत है क्योंकि 16 डिसम्बर‌ को दिल्ली में एक चलती हुई बस में इजतिमाई इस्मत रेज़ि का बे रहमाना वाक़िया पेश आया था. एक 23 साला पैरा मैडीकल तालिबा की इजतिमाई इस्मत रेज़ि 6 लोगों ने की थी जिन में एक नाबालिग भी था।

अटार्नी जनरल जी ई वाहनवती से सुप्रीम कोर्ट ने एक दरख़ास्त में उठाए हुए मसले के बारे में अदालत की मदद करने की ख़ाहिश की थी. दरख़ास्त में बच्चों के साथ इंसाफ़ बच्चों की देख भाल और तहफ़्फ़ुज़ क़ानून में बयान की गई बच्चों की तारीफ़ को मंसूख़ करने की ख़ाहिश है।

जस्टिस एस राधा कृष्णन और जस्टिस दीपक मिश्रा शामिल सुप्रीम कोर्ट के बेंच‌ ने इस केस की अगली समाअत 3 अप्रैल से शुरू करने का फ़ैसला करते हुए अटार्नी जनरल से ख़ाहिश कि वो जवाबी हलफनामों उन्होंने मसले के बारे मे ख़बरों पर जवाबी हलफनामों मे दाख़िल करने की हिदायत दी।

एडवोकेटस कमल कुमार पांडे और सु कुमार ने अपनी दरख़ास्त में अदा-ए-किया कि बच्चों के साथ इंसाफ़ ऐक्ट की दफ़आत 2 (K), 10 और 17 में नाबालिग की जो तारीफ़ की गई है वो नामाक़ूल और दस्तूर के ख़िलाफ़ है. मुशीर क़ानूनी ने दरख़ास्त गुज़ारो की पैरवी करते हुए क़ानून में बच्चे की तारीख़ के दस्तूरी तौर पर कारगर होने के बारे में तलाश की थी और कहा था कि ये आईन की ख़िलाफ़वरज़ी है।

उन्होंने कहा कि क़ानून-ए-ताज़ीरात हिंद की दफ़ा 82 और 83 के तहत इस बेहतर ज़मुरा बंदी मौजूद है. जजस ने कहा कि हमें इस मुआमले का जायज़ा लेना होगा.

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