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बड़ा खुलासा : डीएवी के टीचर्स की फेहरिस्त निकली फर्जी

टीचर एक हैं, लेकिन उनका नाम कई डीएवी में दर्ज हैं। तकर्रुरी भले डीएवी, बीएसइबी के लिए होती है, लेकिन बाद में उन्हें दूसरे जिले के डीएवी स्कूल में भेज दिया जाता है। यह खेल डीएवी में सालों से चल रहा है। इतना ही नहीं, जब-जब सीबीएसइ में रि

टीचर एक हैं, लेकिन उनका नाम कई डीएवी में दर्ज हैं। तकर्रुरी भले डीएवी, बीएसइबी के लिए होती है, लेकिन बाद में उन्हें दूसरे जिले के डीएवी स्कूल में भेज दिया जाता है। यह खेल डीएवी में सालों से चल रहा है। इतना ही नहीं, जब-जब सीबीएसइ में रि-एफिलिएशन के लिए दरख्वास्त दिया गया, तो सीबीएसइ के पास टीचर्स की लंबी लिस्ट भेजी गयी।

डीएवी, बीएसइबी की तरफ से 2003, 2009, 2010 और 2014 में सीबीएसइ के पास 94 टीचर्स की लिस्ट भेजी गयी। इस लिस्ट में कई टीचर ऐसे हैं, जो डीएवी में कभी असातिज़ा के तौर में काम ही नहीं किये हैं। वहीं, तकरीबन 61 टीचर बहुत पहले ही डीएवी, बीएसइबी को छोड़ चुके हैं। स्कूल की तरफ से 2014 में सीबीएसइ को भेजी गयी टीचर्स लिस्ट में 137 परमानेंट व 76 एडहॉक टीचर के नाम हैं।

जब 10 और 16 अक्तूबर को विजिलेंस डिपार्टमेंट ने सीबीएसइ की रेडंमली जांच की, तो पाया गया कि स्कूल में सिर्फ 35 असातिज़ा पीजीटी रेगुलर व 19 एडहॉक पर काम कर रहे हैं। यह फर्जी रिपोर्ट सिर्फ 2014 ही नहीं, बल्कि गुजिशता कई सालों में ऐसा किया गया है। ज़राये के मुताबिक डीएवी, बीएसइबी की तरफ से सीबीएसइ को भेजी गयी लिस्ट में साल 2003, 2009, 2010 और 2014 की लिस्ट में भारी फर्क है। सीबीएसइ की मानें, तो 2009 में 33 पीजीटी (पोस्ट ग्रेजुएट टीचर) और 2010 में 47 दिखाया गया है। जबकि, 2014 में 213 और 2010 में 208 असातिज़ा के नाम लिस्ट में थे।

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