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बम रुक्नुद्दौला की प्लाटिंग का मंसूबा , Soul चौकस

शहर में नहर हुसैनी (बम रुक्नुद्दौला) के साफ़ और शफ़्फ़ाफ़ और शीरीं पानी के इस क़दर चर्चे थे कि आसिफ़ जाहि ख़ानदान के अफ़राद जब कभी हैदराबाद दक्कन से बाहर तशरीफ़ ले जाते तो उन के साथ इस नहर का पानी भी ज़रूर साथ रखा जाता । वैसे तो हैदर

शहर में नहर हुसैनी (बम रुक्नुद्दौला) के साफ़ और शफ़्फ़ाफ़ और शीरीं पानी के इस क़दर चर्चे थे कि आसिफ़ जाहि ख़ानदान के अफ़राद जब कभी हैदराबाद दक्कन से बाहर तशरीफ़ ले जाते तो उन के साथ इस नहर का पानी भी ज़रूर साथ रखा जाता । वैसे तो हैदराबाद में कई एक तालाब नहरें , कुंटे , झीलें और बावलियां हैं लेकिन इन सब में बम रुक्नुद्दौला को बहुत ज़्यादा अहमियत हासिल है।

इस सिलसिले में मौरर्ख़ीन का कहना है कि नवासे रसूल हज़रत इमाम हुसैन(रजी) के इस्मे मुबारक से मानून और मौसूम किए गए इस नहर का पानी भी आप (स.अ.व.) के इस्मे पाक की बरकत से इस क़दर मीठा साफ़ और शफ़्फ़ाफ़ हो गया कि आम रियाया से लेकर उमरा और हुक्मरानों के महलात में उस की तलब आम हो गई।

किंग्स कॉलोनी के करीब और मीर आलम तालाब के मुक़ाबिल वाक़े इस नहर को मीर मूसा ख़ान नवाब रुक्नुद्दौला शहीद मदार अल महाम हज़रत गुफरान आब ने अपने ज़ाती सर्फ़ा से तामीर करवाया था और चूँकि इस नहर को हज़रत इमाम हुसैन (रजी) के नाम मुक़द्दस से मौसूम किया गया था । इस लिए इस का पानी इस क़दर ख़ुशगवार , शीरीं और लतीफ़ साबित हुआ कि आसिफ़ जाहि ख़ानदान ने उसे अपने लिए मख़सूस फ़रमाया

। तारीख़ी कुतुब में आया है कि 1765 में तामीर कर्दा इस नहर को नहर हुसैनी और बम मूसा भी कहा जाता है । इस नहर का संगे नहर पर कभी नस्ब रहा करता था जिस पर ये शेर दर्ज था :

चवां रुक्नुद्दौला बनाम हुसैनी
बनाकर दाएं चशमाए फ़ैज़े आम
पी साल तारीख गुफ़्ता ख़ुर्द
बखू़र आब सर्दी बायादे इमाम

क़ारईन! ! नहर हुसैनी को हुस्न नियत से तामीर करवाया गया था इस का अंदाज़ा इस के हुसैन महल वक़ूअ और डिज़ाइन से लगाया जा सकता है । ये हुसैनी नहर अंग्रेज़ी हुरुफ “S” की शक्ल में खुदाई गई थी जब कि 5 एकड़ पर मुहीत इस नहर के आबे शीरीं को नफीस कपड़े से फिल्टर ( छानते हुए ) ख़ुसूसी तरीका से पैक करके किंग कोठी रवाना किया जाता था।

इस के लिए कई बंडियां मख़सूस थीं। लेकिन सुकूत हैदराबाद दक्कन के बाद इस नहर को एकदम नज़र अंदाज कर दिया गया और अब ये आबादी के बीचों बीच आ गई है । इसे में इस बात की इत्तिलाआत मिल रही है कि चंद बाअसर अफ़राद इस कीमती अराज़ी की प्लाटिंग के लिए मुआमलत कर चुके हैं।

डॉक्टर जास्विन जेराथ ने पुरज़ोर अंदाज़ में कहा कि SOUL ओवर अपने शहर के तारीख़ी आसार और आबी ज़ख़ाइर से मुहब्बत रखने वाले फ़िक्रमंद शहरी नहर हुसैनी की तबाही या इस पर क़ब्ज़ों और प्लाटिंग की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं करेंगे और अगर कोई इस नहर का मुँह मिट्टी और कचरा से बंद करेगा तो हम क़ानूनी कार्रवाई के ज़रीए उस की अक़ल को ठिकाने लगाएंगे और अदालत का दरवाज़ा खटखटाने से भी गुरेज़ नहीं किया जाएगा।

दूसरी जानिब आर टी आई जेहदकार सैयद क़ुतुब उद्दीन मसऊद ने सवाल किया कि आख़िर हम ख़ुद ही अपनी तबाही का सामान क्यों कर रहे हैं ? क्यों दुनियावी फ़ायदे के लिए एक किमती आबी ज़ख़ीरा के वजूद को मिटाने पर तुले हुए हैं? हम इस तरह के ग़ैर मामूली ज़ख़ाइर आब तामीर नहीं कर सकते या बना नहीं सकते तो हमें उन्हें उजाड़ने यह बिगाड़ने का हक़ कैसे पहुंचता है?

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