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बरूनी के सुलतान हसन बुलक्आ की दुख्तर हफ़ीज़ की शादी

बरूनी के सुलतान (Brunei sultan's) हसन बुलक़्आ की शहज़ादी हफीज़ा सुरूरुल बुलक़्आ (Princess Hajah Hafizah Sururul Bolkiah) की आज एक सियोल सरवेंट पनगेरान हाजी मुहम्मद रज़्ईनी (Pengiran Haji Muhammad Ruzaini)से शादी अंजाम पाई ।

बरूनी के सुलतान (Brunei sultan’s) हसन बुलक़्आ की शहज़ादी हफीज़ा सुरूरुल बुलक़्आ (Princess Hajah Hafizah Sururul Bolkiah) की आज एक सियोल सरवेंट पनगेरान हाजी मुहम्मद रज़्ईनी (Pengiran Haji Muhammad Ruzaini)से शादी अंजाम पाई ।

अस्ताना नूरा लिए मान पैलेस के मर्कज़ी हाल में इस पुरशिकोह और यादगार तक़रीब ( उत्सव) का एहतिमाम किया गया था । 1,700 कमरों वाला ये महल सुलतान हसन बुलक़्आ का मस्कन ( रहने का घर) है ।

इन का ख़ानदान 600 बरसों से यहां हुकमरान है । दूलहा और दूल्हन दोनों ही दफ़्तर व मीर आज़म में सुलतान बरूनी के लिए काम करते हैं। सुलतान बरूनी दुनिया के दौलतमंद तरीन अफ़राद में शुमार किए जाते हैं । उन की शहज़ादी की शादी पनगेरान हाजी मुहम्मद रज़ईनी के साथ रिश्ता-ए-इज़दवाज में बंध गएं।

प्रिंसेस हफीज़ा 32 साल की हैं जबकि उन के शौहर 29 साल के हैं। शहज़ादी हफीज़ा सुलतान बरूनी और उन की मलिका सालहा की पांचवीं औलाद हैं। सैंकड़ों मेहमानों अफ़राद ख़ानदान और दोस्त अहबाब-ओ-शाही ख़ानदान वालों की मौजूदगी में दोनों रिश्ता-ए-इज़दवाज (शादी के रिश्ते में)में बंध गए ।

कई बैरूनी ( विदेशी) मेहमानों ने भी तक़रीब ( उत्सव/शादी) में शिरकत की । शहज़ादी हफीज़ा बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री रखती हैं और वज़ारत फायनेंस ( Finance Minister) में ओहदेदार हैं। रज़ईनी वज़ीर आज़म के दफ़्तर में सियोल सरवेंट हैं। सुलतान इस तेल की दौलत से मालामाल मुल्क के वज़ीर आज़म हैं ।

वो दिफ़ा और फायनेंस ( Defence and Finance)के क़लमदान भी रखते हैं। सुलतान हसन अल बुलक्आ के जुमला 12 बच्चे हैं । इन में पाँच लड़के और सात दुख़तर ( बेटी) शामिल हैं। उन्होंने तीन शादियां की हैं। सुलतान हाजी हसन बुलक़्आ भी तक़रीब में मौजूद थे । मलेशिया के वज़ीर आज़म नजीब रज़्ज़ाक़ भी तक़रीब में मदऊ ( आमंत्रित) थे ।

एतवार को इस जोड़े को शाही ख़ानदान में शामिल किया जाएगा जिस के साथ ही एक हफ़्ते से चल रही शादी की तक़ारीब ( शादी) का इख़तताम ( समापन) अमल में आएगा। इस मर्तबा शाही ख़ानदान ने दार-उल-हकूमत ( राजधानी) में रिवायती जुलूस निकालने से गुरेज़ का फैसला किया है ।

शादी की तक़रीब इंतिहाई पुरशिकोह ( अचम्भित करने वाली / भयानक़) थी और उसे अफ़सानवी या अलिफ़ लेलवी तक़रीब से भी तशबेहा दी जा सकती है । बरूनी के शाही ख़ानदान की तक़ारीब अमूमन (खाश तौर पर) इसी शान की होती हैं।

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