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बरेली में दलितों को मंदिर में पूजा करने से रोका गया

बरेली : देश में ऊंच नीच जाति-पात की गहरी खाई पटने का नाम नहीं ले रही है। बड़ी संख्या में दलितों के साथ भेदभाव के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसा ही एक मामला शीशगढ़ में प्रकाश में आया है। जहां कई दशकों से दलित समाज को मंदिर में प्रवेश करना मना है।

दरअसल, सावन के पावन महीने में भगवन भोलेनाथ के मंदिर में जब दलित समाज के लोग जल चढ़ाने पहुंचे, तो सवर्ण समाज के लोगों ने हंगामा कर दिया। शीशगढ़ थाना क्षेत्र के गांव बुझिया में 40 साल से शिव मंदिर के दरवाजे दलितों के लिए बंद हैं। उनका कहना है कि जब से मंदिर बना है, किसी दलित को पूजा की अनुमति नहीं दी गई है।
वहीं ग्रामीणों का कहना है कि करीब पचास साल पहले चौधरी रंजीत सिंह ने अपनी निजी जमीन पर यह मंदिर बनाया था। उन्होंने सिर्फ अपने परिवार की पूजा के लिए इसका निर्माण किया था। इसलिए गांव का कोई अन्य इस मंदिर में नहीं जाता। उनके बाद यह प्रथा दलितों से जोड़ दी गई। गांव के अन्य लोग तो मंदिर में पूजा करने लगे, मगर दलितों पर पाबंदी लगा दी गई।

तब से आजतक दलितों को मंदिर में पूजा नहीं करने दी गई है।दलित समाज के लोगों का कहना है कि उनके बेटे को कांवड़ दल में शामिल नहीं किया गया, क्योंकि वह दलित हैं। इसकी शिकायत तहसील दिवस में की गई तो अफसर हरकत में आ गए। अधिकारियों के कहने पर गांव के विनोद को कांवड़ दल में शामिल कर लिया गया और सभी जल लेने के लिए हरिद्वार रवाना हो गए हैं। लेकिन सवर्ण समाज के लोगों ने मंदिर में जल चढ़ाने के लिए मना कर दिया, इसकी वजह से पूरे गांव में तनाव व्याप्त है। दलितों का कहना है कि धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने या धार्मिक स्थल पर जाने का सभी को मौलिक अधिकार है।

लेकिन इस गांव में पचास सालों से आज तक दलितों को हीन भावना की नजर से देखा जाता है और किसी भी प्रकार के सामूहिक अनुष्ठान में दलितों को नहीं बुलाया जाता, अगर बुलाया भी जाता है तो उनको सबसे अलग बिठा कर खिलाया जाता है। मामला अब पुलिस के संज्ञान में है पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस समस्या का निवारण किया जाएगा।

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