Monday , March 27 2017
Home / Kashmir / कश्मीर: बर्फ में माँ की लाश कंधे पर लेकर चल रहे फौजी जवान अब्बास को अभी तक नहीं मिली मदद

कश्मीर: बर्फ में माँ की लाश कंधे पर लेकर चल रहे फौजी जवान अब्बास को अभी तक नहीं मिली मदद

श्री नगर: सेना के एक जवान मोहम्मद अब्बास को अपनी माँ का शव कंधे पर लादकर ढोना पड़ रहा है. भारी बर्फ के बीच पठानकोट में तैनात अब्बास गांव की ओर बढ़ रहे हैं, जहां उन्हें अपनी माँ को सुपुर्दे खाक करना है. अब्बास का आरोप है कि उन्हें सैन्य प्रशासन ने हेलीकाप्टर नहीं दिया. वह और उनके साथी पिछले चार दिनों से बेहद ख़राब मौसम के बीच चल रहे हैं.

Facebook पे हमारे पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करिये

प्रदेश 18 के अनुसार, अब्बास पंजाब के पठानकोट में तैनात थे और उनकी मां सकीना बेगम उनके साथ ही रहती थीं. बीते 28 जनवरी को उनकी मां का निधन हो गया. अपनी माँ का कफ़न दफ़न वह अपने गांव में करना चाहते हैं जो कुपवाड़ा सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर स्थित है.

अब्बास के भाई शाहनवाज कहते हैं कि हम पहले जम्मू पहुंचे और बाद में श्रीनगर, जहां मां की लाश को ले जाने के लिए सेना ने हेलीकाप्टर देने का वादा किया था, लेकिन हेलिकॉप्टर नहीं दिया गया.

बाद में अब्बास और मैं लाश के साथ कुपवाड़ा के लिए रवाना हुए, ताकि मदद मिल सके. लेकिन विमानन अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी हमें कुछ भी हासिल नहीं हुआ.

कुपवाड़ा जिले के अधिकारियों का कहना है कि हम ने अब्बास को हेलीकाप्टर की पेशकश की थी, लेकिन उनके परिवार ने इनकार कर दिया. सेना के अधिकारियों के दावे पर अब्बास ने सवाल उठाए हैं. अब्बास का आरोप है कि कुपवाड़ा शिविर में तो उसका फोन भी नहीं उठाया जा रहा.

शाहनवाज कहते हैं कि इसके बाद वह चित्रकूट से अपने रिश्तेदारों और कुछ मजदूरों के साथ दाँगयारी से कुपवाड़ा के लिए रवाना हुए. वहाँ मौसम बेहद खराब था, लेकिन गांवों वालों ने काफी मदद की. वहाँ भी हम ने हेलीकाप्टर का इंतजार किया, लेकिन सेना ने नहीं भेजा.

शाहनवाज ने आगे कहा कि बाद में हम पैदल ही वहां से निकल पड़े. अब्बास के साथ हम पिछले 10 घंटों से चल रहे हैं. हमें 30 किलोमीटर चलना है. वहीँ दूसरी ओर इसके उलट कुपवाड़ा के आर्मी अधिकारी का कहना है कि हेलीकॉप्टर यहां से भेज दिया गया है और जल्द ही वहां पहुंच जाएगा.

उन्होंने बताया कि कुछ दिन बाद उन्हें इसी रास्ते से गुजरना है जहां ज़बरदस्त बर्फबारी हो रही रही है. लगभग 50 किलोमीटर की ट्रैकिंग में 10 घंटे से अधिक का समय लग सकता है.

टेलीग्राफ के अनुसार वह 6 फुट बर्फ से घिरे राजमार्ग से गुजर जा रहे हैं, जहां थोड़ी ही दूरी पर बर्फ के भूस्खलन के कारण लगभग 20 सैनिक मारे गए हैं.

Top Stories

TOPPOPULARRECENT