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बर्मा हुकूमत और फ़ौज ( सेना) मुसलमानों के क़त्ल-ए-आम में बराबर की शरीक

पाकिस्तान तहिरीक-ए-इंसाफ़ बर्तानिया के रहनुमा अमजद ख़ान ने कहा है कि मयनमार ( Mayanmar) में बढ़ती हुई कशीदगी से नसल परस्ती और ग़ैर मुल्कीयों के ख़िलाफ़ नफ़रत साफ़ ज़ाहिर हो गई है।

पाकिस्तान तहिरीक-ए-इंसाफ़ बर्तानिया के रहनुमा अमजद ख़ान ने कहा है कि मयनमार ( Mayanmar) में बढ़ती हुई कशीदगी से नसल परस्ती और ग़ैर मुल्कीयों के ख़िलाफ़ नफ़रत साफ़ ज़ाहिर हो गई है।

मारूफ़ ( प्रसिद्व) एन जी ओज़ एमन्सिटी इंटरनैशनल और ह्युमन वाच की रिपोर्टों से वाज़िह ज़ाहिर होता है कि बर्मा की हुकूमत और फ़ौज मुसलमानों के क़त्ल-ए-आम और नसल कशी में बराबर की शरीक हैं। उन्होंने कहा कि सारी दुनिया में मुसलमानों को बिलावजह निशाना बनाया जाता है।

गुज़श्ता रोज़ हिंदूस्तान में मुसलमानों का क़त्ल-ए-आम किया गया मगर हिंदूस्तान हुकूमत ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की । उन्होंने कहा कि रोहनगया कई नसलों से मयनमार ( Mayanmar) में आबाद हैं, इन को तस्लीम किया जाए और उन को शहरीयत (नागरिकता) दी जाय । इन मुसलमानों को तहफ़्फ़ुज़ ( हिफाजत) फ़राहम करना हुकूमत का काम है मगर दुख की बात ये है कि बर्मा की हुकूमत इन मुसलमानों के जायज़ मुतालिबात सुनने के बजाय क़त्ल-ओ-ग़ारतगरी कर रही है।

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