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बालूमाथ कांड : प्रशासन लूट व रंजिश की घटना बताने में लगी है, यह कदम गाै रक्षा समितियों काे बचाने का मक़सद तो नहीं : मानवाधिकार

रांची : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गुजिश्ता 18 मार्च को झारखंड के बालूमाथ में हुए दाे मुस्लिम जानवरों के कारोबारी की क़त्ल कर लाश को पेड़ से लटका दिये जाने के मामले में झारखंड सरकार काे नाेटिस जारी किया है। जारी नाेटिस में झारखंड सरकार के चीफ सेक्रेटरी से चार सप्ताह के अंदर रिपोर्ट के साथ अपना हक़ रखने काे कहा गया है। कमीशन ने दिल्ली के वरीय अधिवक्ता शहजाद पूणावाला की तरफ से दायर याचिका का ज़िक्र करते हुए पूछा है कि गाै रक्षा समितियों की तरफ से अंजाम दिये गये वारदात काे प्रशासन लूट आैर पुरानी रंजिश की घटना बताने में क्यूँ लगी है। प्रशासन का यह कदम घटना काे अंजाम देने वाले गाै रक्षा समितियों काे बचाने का मक़सद से ताे नहीं है।

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जारी नाेटिस में 18 मार्च को हत्या कांड के बाद गुस्साए लोगों की तरफ से मुखालिफत काे कुचलने के लिए पुलिस की तरफ से उठाये गये कदम काे भी मानवाधिकार का उल्लंघन बताते हुए आयोग ने इस संदर्भ में सरकार काे अपना हक़ वजेह करने को कहा है। झारखंड सरकार की तरफ से वाकिया के बाद मुतासिर परिवार का पूरी तरह से मदद नहीं करने और सरकार की तरफ से एलान एक लाख रुपये मुआवजा काे नाकाफी बताया है। कमीशन ने सरकार से इस सिलसिले में अपना हक पेश करने काे कहा है कि दाेनाे मुतासिर परिवार के मरने वाले मेम्बरों पर ही परिवार आश्रित था फिर सरकार ने उचित मुआवजा की एलान क्यूँ नहीं की।हाल के दिनों में अक्लियतों को निशाना बनाकर इस तरह के कई वारदात को अंजाम दिया जा रहा है और इंतेजामिया सतह पर इस तरह की वारदात को रोकने के लिए सरकार ने क्यों काेइ कदम नहीं उठाया।। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की तरफ से यह नाेटिस 31 मार्च को दिल्ली से जारी किया गया है। मानवाधिकार आयोग के इस नाेटिस से एक बार फिर मामला गरमाने की इमकान है।

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