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बाल तस्करी मामले में अदालत ने डॉक्टर की जमानत की अर्ज़ी खारिज करी

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आज एक डॉक्टर की जमानत याचिका खारिज कर दी जिसे बाल तस्करी और गोद लेने के रैकेट में कथित सहभागिता के लिए गिरफ्तार किया गया था। राज्य सीआईडी ​​ने डॉक्टर को नवंबर 2016 में गिरफ्तार किया था।

न्यायमूर्ति ‘आशिम कुमार रॉय’ और ‘अमितवा चटर्जी’ की एक खंडपीठ ने ‘डॉ संतोष सामंत’ को यह कहकर जमानत देने से इनकार कर दिया की आरोपी को इस समय बरी नहीं किया जा सकता।

राज्य द्वारा ज़मानत का विरोध किये जाने के कारण बेंच ने डॉक्टर की जमानत याचिका खारिज कर दी।

ज़मानत याचिका का विरोध करते हुए, अभियोजन पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि रैकेट से जुड़े कई मामले जांच के तहत हैं और इस वक्त ‘सामंत’ को ज़मानत देने से इन मामलों की जांच पर असर पड़ेगा।

ज़मानत के लिए प्रार्थना करते हुए, ‘सामंत’ के वकील ने निवेदन किया कि वह स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और बच्चों की डिलीवरी पर निगरानी रखने के लिए कोलकाता नर्सिंग होम से जुड़े हुए थे।

उनके वकील ने दावा किया की वे बच्चो की तस्करी और गोद लेने के किसी भी रैकेट में शामिल नहीं हैं। रैकेट में कुछ संरक्षण केंद्र और राज्य के कुछ नर्सिंग होमों के कर्मचारियों द्वारा बच्चों को निस्संतान जोड़ो को बेचा जा रहा था।

राज्य सीआईडी ​​को इस रैकेट के बारे में तब पता चला जब उन्होंने उत्तर 24 परगना जिले के बड़ुरिया में बाल संरक्षण घरो पर छापे मारे।

घर में मालिक और कर्मचारियों से पूछताछ के दौरान सीआईडी को केंद्रीय कोलकाता के नर्सिंग होम के बारे में पता चला जिसके साथ ‘सामंत’ जुड़े हुए थे।

दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने चिकित्सक को ज़मानत पर रिहा करने से इनकार कर दिया।

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