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बिना मीटर के आता है बिजली का बिल

जम्मू कश्मीर : जम्मू- कश्मीर मे एलईडी बल्ब अब 20 रुपये की सब्सिडी दर पर उपलब्ध होगें, इनका बाजार मूल्य 250 रुपये है। जम्मू-कश्मीर की पहली महिला मुख्यमंत्री ने 28 अगस्त को जम्मू शहर के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक समारोह में उजाला योजना का शुभारंभ करके उपभोक्ताओं में एलईडी बल्ब वितरित किया। इस योजना का उद्देश्य प्रतिदिन 28.27 लाख बिजली बचाना है। इस योजना के तहत उपभोक्ता रियायती भाव यानी मात्र बीस रुपए में पांच एल एलईडी बल्ब खरीद कर कम पैसे और बिजली की कम खपत में ही अपने घरों को रोशन कर सकते हैं। एक ओर केन्द्र सरकार से लेकर कश्मीर की राज्य सरकार लोगो के घरो को रोशन करने के प्रयास मे लगी है वहीं दूसरी ओर कश्मीर राज्य में स्थित सीमावर्ती जिला पुंछ की ग्रामीण जनता अपनी महबूबा मुफ्ती सरकार से यह सवाल कर रहे हैं कि जिन क्षेत्रों में अभी तक बिजली नहीं पहुंच पाई है उनके लिए कौन सा बल्ब और कौन सी योजना सरकार के पास है? या जिन क्षेत्रों में बिना मीटर के ही बिजली के बिल आ जाते हैं, उनके क्षेत्र के लोगों के लिए अपनी उक्त योजना से कितना फायदा होगा?? इसका पता तब चला जब लेखक ने भारत की अग्रणी गैर सरकारी संगठन चरखा डेवलपमेंट कम्यूनिकेशन नेटवर्क के माध्यम से जिला पुंछ में तैयार किए गए एक लेखक समूह जिसे हवेली राइटर ग्रुप के नाम से जाना जाता हैं उनके लेखकों के साथ राज्य के सीमावर्ती जिले पुंछ की तहसील सुरनकोट के हाड़ि (मिलेटेंसी प्रभावित क्षेत्र) जम्मू शहीद, रजाड़ह ढोक, के दामन में स्थित गांव हाड़ी की पंचायत, हाड़ी अपर और हाड़ी लोवर को दौरा किया। इस भ्रमण के दौरान ग्रुप के सद्स्यों ने पाया कि यहां के वार्ड नंबर पांच और छह में बिजली के नंगे तारों को हरे भरे पेड़ो और लकड़ी के खम्भों पर लापरवाही से बांध दिया गया है, जो किसी भी दुर्घटना को दावत देने के लिए पर्याप्त है। कई लोगों की जानें अचानक इन बिजली के तारों के गिरने की वजह से जा चुकी हैं और कई इस कारण मरें तो नही, हां पर विकलांग होकर अपने जीवन का बोझ उठाने पर मजबूर हैं।

हवेली राइटर ग्रुप के लेखको ने जब वहां के कुछ लोगो से इस बारे मे बात की तो उन्होने बताया जब यह तारें टूट जाती तो उनको खुद ही इसकी मरम्मत करनी पड़ती है जिसकी वजह से लोगों को शॉर्ट भी लगे हैं और उनकी मृत्यु भी हुई हैं | ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले इस क्षेत्र मे अब्दुल नामक एक युवक की मौत बिजली के शॉर्ट लगने से हो चुकी है। बिजली विभाग की मुस्तैदी के बारे गांव हाड़ि के शाहनवाज बांडे बताते हैं कि बिजली विभाग यहां की जनता पर इतनी मेहरबानी और इनायत है कि बिना मीटर के 360 रुपये बिजली का बिल आता है जिन्हें भुगतान करना पड़ता है, हालांकि गांव के लोग मीटर लगाने की मांग बार बार करते हैं। वे आगे कहते हैं कि शहरों के लोगों को बिजली से चलने वाले उपकरणों का उपयोग करके भी कम किराया देना पड़ता है जबकि हम लोग बिजली से केवल मोबाइल फोन ही चार्ज करते हैं अगर विभाग मे बिजली से संबंधित शिकायत दर्ज कराई जाती है तो वह धमकी देते हुए कहते हैं कि जो थोड़ी बहुत है वो भी चली जाएगी।

उपर्युक्त वाक्य से यह स्पष्ट है कि भले ही सरकार देश के हर एक घर तक एल-इ- डी बल्ब पहुंचाने का मन बना रही है लेकिन उसे जलाने के लिए बिजली को उन घरो तक पहुंचाना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
आगा अशफाक सेहड़ी ख्वाजा
(चरखा फीचर्स)

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