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बिरयानी आयोग की सख़्त ज़रूरत, अगर बीफ नहीं निकला तो दिया जाएगा दोष मुक्त बिरयानी का ख़िताब

नई दिल्ली: भारत में बिरयानी आयोग की सख़्त ज़रूरत है। प्रांत और माँस के अलग अलग प्रकारों को देखते हुए ज़रूरी है कि बिरयानी आयोग कम से कम दस सदस्यीय हो। आयोग का हर सदस्य कम से कम एक बिरयानी का ज्ञाता हो और दोस्तों के बीच बिरयानी खाने को लेकर मशहूर हो। बिरयानी आयोग में कोई शाकाहारी सदस्य नहीं होगा। सिर्फ गली चौराहे से बिरयानी के सैंपल उठाने वाले कर्मचारी शाकाहारी होंगे ताकि उन पर सैंपल की धौंस दिखाकर दो प्लेट बिरयानी मुफ़्त में चपत कर जाने का आरोप न लगे।

बिरयानी आयोग के सदस्यों खाकर बताना होगा कि बिरयानी कैसी बनी है मतलब किस चीज़ की बनी है। वो घर से लंच नहीं लायेंगे। जो सैंपल आएगा उसी में से खाते रहेंगे। खा खा कर बतायेंगे कि चिकन बिरयानी है या मटन या बीफ या आचारी या अंडा बिरयानी है।

बिरयानी आयोग के सदस्य दोपहर बाद आयेंगे जब बाज़ार में सड़कों के किनारे बिरयानी की देग रखी जाती है। कुछ जगहों पर दोपहर से पहले ही मिलने लगती है। इन दिनों भारत में ग़रीब तबक़ा मोमो और गन्ने के जूस की तरह बिरयानी बेचने निकल पड़ा है। जो घर में बनाता था वही बाहर बना कर बेच रहा है। पहले सड़क पर इतनी मात्रा में बिरयानी नहीं मिलती थी। रेस्त्रां में या फिर शादी में बनती थी। जिनके घर में अम्मी अंकल बिरयानी बना लेते थे हम उस घर से कभी बिगाड़ नहीं करते थे। बिरयानी खाने का चांस मैं नहीं गँवा सकता था। बहरहाल गरीब बिरयानी बेचकर अपना गुज़ारा कर रहा है। ग़रीब का गुज़ारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसके लिए देग देग घूम कर बिरयानी के सैंपल लिये जाएँगे। उनकी जाँच होगी कि बिरयानी में बीफ है या नहीं। बिरयानी में चावलों के बीच छिपा हुआ माँस बीफ भी हो सकता है। चैनलों के मुताबिक़ आपत्तिजनक अवस्था में हो सकता है या घोर आपत्तिजनक अवस्था में भी हो सकता है। सैंपल वाले माँस की कान पकड़ लैब ले जायेंगे। अगर बीफ साबित हुआ तो बिरयानी वाले को सज़ा होगी। जेल जायेगा। अगर चावलों ने भी बीफ छिपाने में मदद की है तो उन्हें या उन्हें उगाने वाले किसान को भी जेल जाना होगा। राष्ट्रीय बिरयानी आयोग बिरयानी को लेकर एक नई नीति लेकर आएगा।

अगर बिरयानी में बीफ नहीं निकला तो उसे दोष मुक्त बिरयानी का ख़िताब दिया जाएगा। सरकारी बिरयानी का मुहर लगेगा। जो बिरयानी दोषी होगी,उसे आयोग के सदस्य चुपचाप खा जाएँगे। पर्यटकों के लिए ‘ख़ास बिरयानी’ का लाइसेंस मिलेगा, जिसे वीज़ा दिखाकर प्राप्त किया जा सकेगा। फ़ाइव स्टार होटलों की बिरयानी के सैंपल नहीं लिये जायेंगे। शादी ब्याह के दौरान हमारे आयोग की टीम छापे मारेगी। बिरयानी का सैंपल लेकर बारात को कमरे में ही सील कर देगी। अगले दिन सैंपल रिपोर्ट आने के बाद ही बाराती खा सकेंगे और घर जा सकेंगे।

जल्दी ही अलग से एक बिरयानी पुलिस होगी। जो आगे चलकर कबाब, कोरमा और करी से सैंपल लेगी। ये पुलिस शाकाहारी होंगे ताकि सैंपल रास्ते में चपत न कर जायें। बिरयानी इंस्पेक्टर, कोरमा इंस्पेक्टर और एस एस पी ( करी), डी एस पी ( कबाब) होंगे। बिरयानी बनाने वालों की शामत आएगी। उन पर डर का साया होगा। धीरे धीरे बिरयानी समाप्त हो जाएगी। धीरे धीरे ग़रीब समाप्त हो जाएँगे। इसके लिए वर्ष 20420 तक का लक्ष्य रखा गया है।

राष्ट्रीय बिरयानी आयोग वेज बिरयानी की प्रतियोगिता आयोजित करवायेगा ताकि नॉन वेज बिरयानी की लोकप्रियता कमज़ोर हो। गोश्त का कोई दोस्त नहीं होता, ये हमारा नारा होगा। भय मुक्त बिरयानी का अभियान चलेगा। बाकी जो नहीं चलेगा वो खाकर टी वी स्टुडियो चला जाएगा और बिरयानी की बात करने वालों को निपटा आएगा । बिरयानी आयोग का आइडिया मेरा है। आप सपोर्ट करेंगे तो हम कटहल की सब्ज़ी से लेकर आलू दम के भी सैंपल उठायेंगे। बिरयानी मुक्त भारत बनायेंगे। नहीं बना सकेंगे तो बिरयानी खा जायेंगे।

 

रविश कुमार

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