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बिरयानी में बीफ ढूंडने का असर बडा पशु मेले पर

इस बार मेवात के पशु मेले में आये मात्र 20 फीसदी पशु,इस बार व्यापारी दूसरे राज्यों में कुर्बानी के पशु नहीं ले गये।
मैनका गांधी, गोरक्षा दल, बजरंग दल और पुलिस करती है प्रताडित, एक टेंपू पर लेते हैं 10 से 30 हजार रूपये तक कि रिश्वत

मेवात(हरियाणा )  । गो सेवा आयोग द्वारा मेवात कि बिरयानी मे बीफ ढूंडने का असर केवल बिरयानी विक्रेताओं पर ही नहीं पडा बल्कि पशु व्यापारियों पर भी पडा है। मेवात जिला के फिरोजपुर झिरका कस्बे में हर सोमवार और मंगलवार को लगने वाले पशु मेले में इस बार मात्र 20 फीसदी ही भैंस, पडिया और कटरे आये। पशु कम आने कि वजह से शाम 6 बजे तक चलने वाला पशु मेला दोपहर एक बजे ही समाप्त हो गया। पशु मेले में एक बजे दर्जन भर ही पशु नजर आये। मेले में पहुचे व्यारियों का अरोप मैनका गांधी, गोरक्षा दल, बजरंग दल और पुलिस उनको प्रताडित करती है। इस वजह से फिरोजपुर झिरका पशु मैले से दिल्ली, अलीगढ और खुर्जा आदी इलाकों कि पशु मंडियो मे इनके डर कि वजह से नहीं ले गये। कुछ लोग ले गये तो उनके पशु लूट लिये गये या फिर पैसे लेके छोडे गये। इस लूट खसौट के धंधे में पुलिस और पशुओं के नाम पर बने दल उनको पताडित करते हैं। फिरोजपुर झिरका से दिल्ली मंडी तक मैनका गांधी, गोरक्षा दल, बजरंग दल और पुलिस का एक टेंपू पर 10 से 30 हजार रूपये तक कि रिश्वत लेते हैं। रिश्वत ने देने पर पशुओं को लूट लेते है या फिर भैंस की जगह उसमें गाय रख देते हैं। व्यापारियों को झूठे कैस में पुलिस की मिली भगत से फंसाया जाता है। व्यापारियों का कहना है कि इन संगठनों के प्रताडना कि वजह से मेवात के सैंकडो व्यापारी इस बार दूसरे राज्यों में कुर्बानी के पशु नहीं लेकर गये हैं।

क्या कहते हैं व्यापारी
व्यापारी लियाकत, आस मोहम्मद और असलम ने बताया कि इस बार पशु मेले में बहार से ने तो पशु ही लाये हैँ और न ही दूसरे राज्यों में पशु बैचने के लिये ले गये हैं। उन्होने आरोप लगाया कि गोरक्षा दल, बजरंग दल और पुलिस आपस में मिली हुई है। मेवात के घासेडा गांव से निकलते ही ये लोग पुलिस के साथ हर चौहरायें पर खडे मिलते हैं। एक टेंपू से 500 रूपये से एक हजार रूपये तक रिश्वत लेते हैं, अगर नहीं देते तो पुलिस वाले उनके टेंपुओ को थाने में बंद कर देते हैं। इस लिये उनको मजबूर होकर रिश्वत देनी पडती है। उन्होने कहा कि मैनका गांधी की संस्था के सदस्य जब भी मिल जाते हैं वे एक टेंपू पर 10000 से 30000 हजार रूपये तक लेते हैं ने देने पर भैंस कटरे आदी को छीन लेते हैं और उनकी जगह पुलिस की मदद से टेंपूओं मे गाय भर देतें हैं। उनके साथ मारपिटाई जो की जाती है वह अलग है। पशु रक्षा के नाम पर उनके साथ अत्याचार किया जा रहा है। इसकी अधिकारियों से शिकायत की पर कोई अमल नहीं होता है। उन्होने कहा जब से मेवात में बिरयानी में गाय का मांस ढूडने के सैंपल लिये गये है तब से व्यापारी बेहद परेशान है। इस डर कि वजह से मेवात के व्यापरी दूसरे राज्यों में अपने पशुओं को बैचने के लिये नहीं ले गये हैं।

क्या कहते हैं पशु मंडी मालिक
फिरेाजपुर झिरका मंडी के एक मालिक गुलाब ने बताया कि 24 लोगों ने मिलकर दो महिने पहले इस मंडी को एक करोड 91 लाख रूपये में एक साल के लिये ठेके पर लिया है। उनको उम्म्ीद थी कि बकराईद के मौके पर उनको कुछ कमाई होगी लेकिन इस बार केवल 20 फीसदी ही मंडी में पशु आये हैं। हर साल बकराईद के मौके पर शाम 6 बजे तक मंडी चलती थी लेकिन आज एक बजे भी खत्म हो गई। उन्होने कहा कि लोग दूसरे राज्यो और पशु मेले मे पशु लाने कि बजाये लोकल ही पशुओं को बैचने में अपनी गनीमत समझी है।

साभार : यूनुस अलवी

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