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बिरादराने वतन से बेहतर ताल्लुक़ात बनाने मुसलमानों पर ज़ोर

हालात की तबदीली कोई अनहोनी बात नहीं हैं। एसे हालात में हमें चाहीए कि अल्लाह ताआला से ताल्लुक़ को मज़बूत करें।

हालात की तबदीली कोई अनहोनी बात नहीं हैं। एसे हालात में हमें चाहीए कि अल्लाह ताआला से ताल्लुक़ को मज़बूत करें।

इन ख़्यालात का इज़हार जमाते इस्लामी के मर्कज़ी इजतिमा आम में सदारती ख़िताब करते हुए अमीर मुक़ामी ज़ाकिर हुसैन ने किया ।उन्होंने कहा कि मुसलमानों को चाहीए के वो अपनी मंसबी ज़िम्मेदारी यानी दाईआना किरदार अदा करते हुए बिरादराने वतन से बेहतरीन ताल्लुक़ात-ओ-रवाबित रक्ने की कोशिश करें।

इस से पहले सूरत अलनमल की आयात 87 ता 90 की रोशनी में दरस क़ुरआन पेश करते हुए ज़ाकिर हुसैन ने क़ियामत के दिन जबकि पहला सूर फूंका जाएगा। उस वक़्त अहल ईमान और दुसरे के हाल का तज़किरा का ज़िक्र करते हुए कहा कि उस रोज़ तमाम चीज़ें जो आसमान-ओ-ज़मीन में हैं होल खा जाएंगी। सिवाए उन लोगों के जो अपने साथ भलाई लेकर आयेंगे।

जो लोग बुराई लेकर आएं गे , वो सब औंधे मुँह आग में फेंक दिए जाऐंगे। रिश्वतख़ोरी और सूदखोरी के उनवान पर ख़िताब करते हुए मुहम्मद अबदुलक़ादिर ने कहा कि अल्लाह ताआला ने लानत की है सूद खाने और खिलाने वाले की, इस के गवाह बनने और उस की दस्तावेज़ लिखने वाले पर। और एक हदीस में ये भी कहा गया हैके सूद खाना अपने माँ के साथ ज़ना करने जैसा है।

आप ने कहा कि मेराज के वाक़िये में भी सूदखोर के बुरे अंजाम का ज़िक्र मिलता है। सूद की दुनियावी ख़बासतों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सूद इंसान के अंदर बगै़र मेहनत के पैसा कमाने का मिज़ाज बनाता है।

इस लिए मुआशरा तबाह-ओ-बर्बाद होता है। इसी तरह रिश्वत देने और लेने वालों पर अल्लाह ताआला की लानत है। नबी करीम(स०) के दौर में सूद का निज़ाम इन्फ़िरादी तौर पर एक एक फ़र्द चलाता था लेकिन आज ये निज़ाम इदाराती अंदाज़ में चलाये जाता है और हुकूमतें भी इस में शामिल हैं जिस के नतीजे में कई एक मुल्क उसकी जकड़ में फंसे हुए नज़र आते हैं।

इसी निज़ाम की वजह से ना सिर्फ़ इंसान बल्कि ममालिक भी ग़ुलाम बनते जा रहे हैं। इस लानत से बचने की तदाबीर का ज़िक्र करते हुए अबदुलक़ादिर ने कहा कि मुसलमानों में बिलख़सूस हलाल-ओ-हराम में तमीज़ करने का शऊर बेदार करना कि वही चीज़ हलाल होसकती है जिस को अल्लाह ताआला ने हलाल क़रार दिया है और जिस को अल्लाह ताआला ने हराम क़रार दिया है वो किसी भी सूरत में हलाल नहीं होसकती।

बदगुमानी के उनवान पर कनड़ा ज़बान में मूसिर दरस हदीस पेश करते हुए ज़ुल्फ़क़ार अली ने इस के तमाम पहलूओं पर रोशनी डाली। अबदुलक़ुद्दूस ने हालात-ए हाज़रा पर तबसरा किया। अमीर मुक़ामी ज़ाकिर हुसैन के एलानात-ओ-दुआ के साथ इजतिमा इख़तेताम को पहुंच।

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