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बिसहड़ा: रवि की मौत के दौरान भाजपा नेता ने दंगा भड़काने की कोशिश की थी

(Left to Right) BJP MLA Sangeet Som addressing the crowd at Bisada with DM NP Singh, Union minister and Gautam Buddha Nagar MP Mahesh Sharma and SSP Dharmendra Singh.

“हमको इसका बदला चाहिए और हम इसका बदला ले कर रहेंगे,हिंदुओं ने चूड़ियाँ नहीं पहनी, इन मुल्लों को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे”
यह बयान और किसी का नहीं बल्कि भाजपा कार्यकर्ता कपिल भाटी का है।
यह अख़लाक़ के हत्यारे रवि सिसोदिया की चिकनगुनिया से मृत्यु होने पर उसकी श्रद्धांजलि की वीडियो में सामने आया है।
सिसोदिया के शव को तिरंगे में लपेट कर उसे शहीद बताया गया, यह प्रचलन आम चूका है कि हत्यारों को तिरंगे में लपेट कर शहीद की उपाधि दी जाने लगी है।
जहां ऐसे भड़काऊ बयान देने पर भाटी के खिलाफ केस दर्ज़ होना चाहिए था और तिरंगे के अपमान में कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए थी, वहीं ठीक इसके उलट इस घटना की वीडियो बनाने वाले हिन्दू दैनिक समाचार के रिपोर्टर “मोहम्मद अली” को उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर सेल द्वारा कॉल करके वीडियो डिलीट करने की धमकी दी गयी जिसके जवाब में रिपोर्टर ने पुलिस अधिकारी से कपिल भाटी के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की और कहा कि भाटी के ख़िलाफ़ केस दर्ज़ किया जाए, तब में इस वीडियो को डिलीट कर दूँगा।
गौरतलब है कि एक साल पहले हुई अख़लाक़ की हत्या को भाजपा और सपा ने सामान्य घटना बता दिया था। ऐसी घटनाएं साफ़ दर्शाती है कि यह हिन्दू राष्ट्र बनाने में सभी पार्टियों का समर्थन है।
पुलिस के अनुसार, गौ हत्या का कोई सबूत अख़लाक़ के घर में नहीं मिला है, इस से स्पष्ट हो जाता है की यह हत्या थी।
भाजपा के सत्ता में आने के बाद सभी हिन्दू संगठन बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद् और हिन्दू महासभा (जो की गांधी जी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की विचारधारा पर आधरित है) भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
आज के हमारे इस उभरते देश की खासियत बहुसंख्यकी सुर को सिर्फ सुनना है और न्यायिक प्रिक्रिया करने के बजाय बड़े बड़े भड़काऊ भाषण देना मात्र है। पुलिस द्वारा गौ रक्षकों का पक्ष लेना और मुस्लिमों पर गौरक्षा के नाम पर हत्या कर देना इस बात का सुबूत है।
पिछले महीने एक मुस्लिम इंस्पेक्टर ने आरएसएस कार्यकर्ता द्वारा व्हाट्सएप्प पर इस्लाम के खिलाफ आपत्तीजनक सन्देश फैलाने पर गिरफ्तार किया था जिसके बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया था।

समर हलंकर Indiaspend.org, के संपादक हैं
(ये लेख हिन्दुस्तान टाइम से लिया गया है जिसको ओसामा ज़करिया ने सिआसत के लिए अनुवाद किया है)

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