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बिहारः एनडीए में वजीरे आला ओहदे के 11 दावेदार

बिहार में एनडीए में वजीरे आला ओहदे की उम्मीदवारी के लिए कई लोग ताल ठोक रहे हैं। कुछ खुलेआम, कुछ हिमायतों के ज़रिए, तो कुछ अपने-अपने बयानों के रास्ते। चौंकाने वाली बात यह कि इस ओहदे के लिए सबसे ज़्यादा दावेदार खुद भारतीय जनता पार्टी

बिहार में एनडीए में वजीरे आला ओहदे की उम्मीदवारी के लिए कई लोग ताल ठोक रहे हैं। कुछ खुलेआम, कुछ हिमायतों के ज़रिए, तो कुछ अपने-अपने बयानों के रास्ते। चौंकाने वाली बात यह कि इस ओहदे के लिए सबसे ज़्यादा दावेदार खुद भारतीय जनता पार्टी के अंदर हैं ।

सुशील कुमार मोदी : बिहार भाजपा के सबसे कद्दावर लीडरों में से एक। तंजीम पर ज़बरदस्त पकड़।
लालू यादव और उनकी पार्टी के खिलाफ जद्दो-जहद में ढाई दशक से सुशील भाजपा का चेहरा रहे हैं। नीतीश कुमार के काबीना में नायब वजीरे आला भी रहे।

रविशंकर प्रसाद : नरेंद्र मोदी काबीना में सीनियर वज़ीर रविशंकर प्रसाद बिहार भाजपा के उन लीडरों में शामिल हैं जो क़ौमी सियासत में अहम मुकाम रखते हैं। साथ ही वजीरे आजम की ‘गुड बुक्स’ में भी माने जाते हैं।

जीतनराम मांझी : एनडीए में शामिल होने के बाद मांझी फिलहाल वजीरे आला ओहदे पर दावेदारी छोड़ चुके हैं। लेकिन दिलचस्प यह कि इसी दावेदारी को लेकर मांझी ने जदयू से बगावत की थी। ऐसे में माना जा रहा है कि हालत देखते ही ये अपनी पुरानी ख्वाहिश के लिए आवाज़ बुलंद कर सकते हैं।

नंदकिशोर यादव : बिहार रियासत भाजपा के साबिक़ सदर और मौजूदा में एसेम्बली में मुखालिफ़ पार्टी के लीडर हैं नंदकिशोर। वे उस यादव तबके से आते हैं जिनकी आबादी बिहार में सबसे ज्यादा और इंतिख़ाब में मजबूत है।

रामविलास पासवान : लोक जनशक्ति पार्टी के सदर रामविलास सियासत में लालू और नीतीश से भी सीनियर हैं। माना जाता है कि सालों से वजीरे आला बनने की ख़्वाहिश रखते हैं। फिलहाल एलानिया तौर से वजीरे आला ओहदे की उम्मीदवारी पर दावा उन्होंने छोड़ा हुआ है।

शत्रुघ्न सिन्हा : बिहार में भाजपा को बुलंदियों पर पहुंचाने वालों में से एक। कभी इंतिख़ाब में भाजपा के स्टार हुआ करते थे। अभी हाल में ही अपनी पार्टी को इन्होंने सलाह दी थी कि भाजपा इंतिखाबी जंग में जनरल की ऐलान कर मैदान में उतरे।

सीपी ठाकुर : पेशे से डॉक्टर सीपी ठाकुर मरकज़ी वज़ीर रह चुके हैं। पीर को इन्होंने भी कहा कि वे वजीरे आला की कुर्सी संभालने को तैयार हैं।

गिरिराज सिंह : नरेंद्र मोदी का कट्टर हिमायती होना गिरिराज सिंह की सबसे बड़ी सियासी पूँजी है।
वे उस दौर में भी नरेंद्र मोदी के हक़ में आवाज़ बुलंद करते थे जब जदयू से इत्तिहाद की वजह बिहार के ज्यादातर भाजपा लीडर मोदी के सवाल पर चुप रहना पसंद करते थे।

प्रेम कुमार : नीतीश सरकार में वज़ीर रहे प्रेम सातवीं बार एमएलए बने हैं। अपनी सीनियारिटी की बुनियाद पर खुद को कई बार वजीरे आला ओहदे का उम्मीदवार बता चुके हैं।

रामकृपाल यादव : 2014 के आम इंतिख़ाब में टिकट के सवाल पर लालू के खासमखास रहे रामकृपाल लालू से अलग हुए थे। साथ ही लालू की बेटी को हराकर लोक सभा पहुंचे और फिर मरकज़ी वज़ीर भी बने। बहुत कम वक़्त में भाजपा के उन लीडरों में शामिल बताये जाते हैं जिन पर भाजपा दांव खेल सकती है।

उपेंद्र कुशवाहा : उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी उम्मीदवारी के लिए एनडीए में अर्जी दे दी है। वे एनडीए के साथी पार्टियों राष्ट्रीय लोक समता पार्टी यानी रालोसपा के क़ौमी सदर और मरकज़ी वज़ीर हैं। उन्होंने खुद पीर को दिल्ली में कहा कि भाजपा में जारी टकराव को देखते हुए रालोसपा ने उन्हें वजीरे आला ओहदे का उम्मीदवार चुन कर एक रास्ता दिखाया है।

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