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बिहार : झारखंड से देशी और अंग्रेजी शराब आने शुरू, दुगुनी दामों पर बिक्री 

पटना. सरकार ने बिहार में शराब पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है। इस फैसले के बाद झारखंड में शराब की बिक्री बढ़ गई है। बिहार में झारखंड से बड़ी मिक़दार में देशी और अंग्रेजी शराब आने शुरू हो गए हैं।  ‘पियक्कड़’ बिहार में शराब की बिक्री पूर्ण प्रतिबंध के बाद झारखंड से मंगवा रहे हैं दारु।  झारखंड से आने वाली बसों से मंगवाये जा रहे हैं शराब। शराब की दो गुणी कीमत चुका रहे हैं ‘पियक्कड़’। 400 की शराब के लिए 1200 रुपए तक दिए जा रहे हैं।

बस ड्राइवर और खलासी की बढ़ी आमदनी

झारखंड से बिहार के लिए बस लेकर निकले ड्राइवरों और खलासी की आमदनी बढ़ गई है।  सुबह से ही ‘पियक्कड़’ बस स्टैंड पहुंचकर अपने लिए शराब की बुकिंग शुरू करवा रहे हैं। बढ़ती मांग पर बस ड्राइवर और खलासी शराब लाने के लिए मनमाना पैसा वसूल रहे हैं। ज़राए का कहना है कि शराब की कीमत से 1000 रुपए तक ज्यादा का पैसा वसूला जा रहा है।

एक अप्रैल से रियासत भर में शराबबंदी की एलान होते ही ख्वातीन ने सुकून की सांस ली। शराबबंदी के असर का अंदाजा सिर्फ इससे लगाया जा सकता है कि महिला आयोग से लेकर महिला थाने में गुजिश्ता पांच दिन में एक भी शराब पीकर पीटने की शिकायत नहीं आयी है। जबकि एक अप्रैल से पहले हर दिन सिर्फ महिला आयोग में तीन से चार मामले दर्ज कराये जाते थे।

ख्वातीन की शिकायत रहती थी कि शौहर शराब के नशे में पीटते हैं।  दिन-रात शराब के नशे में रहते हैं।  यहां तक की घर का खर्च भी नहीं देते। महिला आयोग की सदर अंजुम आरा ने बताया शराब पर पाबंदी के बाद खातून हिंसा के मामले कम हुए हैं।  घरेलू ¨हसा और दहेज प्रताड़ना के मामलों में भी कमी आयी है। खातून थाना इंचार्ज नीलमणि ने कहा कि एक अप्रैल से पहले हर दूसरे दिन शराब पी कर पिटने का मामला आता था।  शराबी शौहरों की तरफ से पीटकर लहूलुहान हालत में ख्वातीन  आतीं थीं।  कई खातून तो फोन करके शराबी शौहरों की  तरफ से पीटने की इत्तिला देती थीं।  उन्हें घर से बचाकर लाया जाता था।  बड़ी मुश्किल से उनकी काउंसिलिंग करायी जाती थी।  समझौते के बाद भी एक-दो महीने बाद महिलाएं पति पर कार्रवाई की मांग करती थीं।

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