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बिहार : दारू बेचने वाले लोग दूध बेचने को तैयार नहीं

गया : एक अप्रैल आने में अब महज़ तीन दिन बाक़ी हैं। नशामुक्त बिहार को बनाने के लिए वज़ीरे आला नीतीश कुमार ने एक अप्रैल से शराबबंदी की एलान की है, साथ ही शराब बेचने वालों को दूध व दही बेचने की नसीहत भी दी थी। नसीहत के बाद भी दारू बेचने वालों में दूध बेचने की जरा भी दिलचस्पी नहीं है।
जिले में देशी व विदेशी शराब की करीब 133 लाइसेंसी दुकानें हैं। हर दिन मगध सुधा डेयरी के अफसर शराब कारोबारियों से मुलाकात कर दुकान में सुधा दूध का रिटेलरशिप लेने को कहा जा रहा है, लेकिन शराब कारोबारी एक अप्रैल के बाद से इस सिम्त में पहल शुरू करने की बात कह रहे हैं।

जिले के 133 लाइसेंसी शराब के दुकानदारों में 14 दुकानदारों ने फरवरी माह में ही सुधा दूध का रिटेलरशिप लेने की बात कही थी, जिनमें अभी तक महज़ एक शराब कारोबारी ने सुधा दूध का रिटेलरशिप लेने के लिए फॉर्म अप्लाई किया है। बाकी का कहना है कि एक अप्रैल के बाद से इस पर गौर करेंगे। अफसरों की मानें तो सुधा डेयरी में मुनाफा कम होने की वजह से शराब कारोबारी इससे जुड़ना नहीं चाहते हैं।

मगध डेयरी प्रोजेक्ट के मैनेजिंग डैरेक्टर डीके सिंह का कहना है कि शराब के कारोबारियों में आमदनी काफी अच्छी होती है। दारू बेचने वालों को दूध बेचना पड़े तो उन्हें परेशानी हो जरूर होगी। मगध डेयरी के अफसर व कर्मी हर दिन इन दुकानदारों से राब्ता में हैं, जो लोग इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं उन्हें सुधा दूध का रिटेलरशिप दे दिया जा रहा है। शराब कारोबारी एक अप्रैल के बाद से ही कोई फैसला लेने की बात कहते हैं। अगर जहानाबाद जिले की बात करें तो यहां करीब 20 शराब के लाइसेंसी होल्डर हैं, जिसमें तीन शराब दुकानदारों ने सुधा का रिटेलरशिप लेने का मन बनाया था। अब दो दुकानदार एक अप्रैल के बाद रिटेलरशिप लेने की बात कह रहे हैं। वहीं अरवल में 13 और औरंगाबाद में 74 लाइसेंसी शराब की दुकानें हैं, इसमें अरवल में एक और औरंगाबाद में पांच लोगों ने सुधा दूध का रिटेलरशिप लेने की बात कही, लेकिन इन दो जिलों में भी अभी तक रिटेलरशिप के लिए किसी ने अप्लाई नहीं किया।

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