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बिहार ने दिखायी हिम्मत, तो झारखंड क्यों नहीं

रांची : झारखंड के मुकाबले बिहार में शराब से राजस्व वसूली चार गुना ज्यादा था. पीएजी के अदाद व शुमार के अनुसार 2014-15 में बिहार को शराब से 3216.55 करोड़ रुपये राजस्व हासिल हुआ था, वहीं झारखंड को शराब से 740.16 करोड़ रुपये का ही राजस्व मिला. साल 2015-16 में झारखंड सरकार को शराब से राजस्व के तौर में 915.68 करोड़ मिले थे. रियासत की तशकील के पहले साल 2001-02 में सरकार को शराब से सिर्फ 100.20 करोड़ रुपये मिले थे. इसके बाद के दो सालों में शराब का राजस्व 100 करोड़ के नीचे गिर गया था. राजस्व गिरने के बाद सरकार ने पड़ोसी रियासतों में शराब से मिनलेवाले राजस्व का ब्यारो व शराब से मुताल्लिक दस्तुरुल अमल का जायजा लिया. इसके बाद रियासात में भी शराब बंदोबस्ती की पालिसी में तौसिह बदलाव किया गया.

इसके बाद शराब से मिलने वाले राजस्व में धीरे धीरे इजाफा हुई. साल 2015-16 में सरकार ने रियासत में 433 देसी शराब की दुकान, 658 विदेशी शराब की दुकान और 315 कंपोजिट शराब की दुकान की बंदोबस्ती की थी. इससे 915.68 करोड़ रुपये का राजस्व मिला. साल 20016-17 के लिए सरकार ने 419 देसी शराब की दुकान, 662 विदेशी शराब की दुकान व 317 कंपोजिट शराब की दुकान की बंदोबस्ती की है.

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