Tuesday , September 26 2017
Home / Bihar News / बिहार में बीजेपी का बेड़ा पार ज़ात की बुनियाद पर

बिहार में बीजेपी का बेड़ा पार ज़ात की बुनियाद पर

पटना : भाजपा ने बिहार एसेम्बली इंतिख़ाब के लिए उम्मीदवार तय करने में जातीय फॉर्मूला और केमेस्ट्री, दोनों का सहारा लिया है। पार्टी की तरफ से अब तक एलान 152 उम्मीदवारों के नामों से यह वाजेह है कि हिसाब और केमेस्ट्री को मिलाकर जीत का फॉर्मूला बनाने की पूरी कोशिश भाजपा के पॉलिसी साज़ों ने की है। अगर जाति का हिसाब देखें तो इन 152 में से सबसे ज़्यादा 65 सीटें पसमानदा व इंतेहाई पसमानदा जातियों को दी गई हैं. इसमें से भी 22 यादव हैं। 64 उम्मीदवार ऊंचे तबके के हैं और 21 दलित व महादलित। जीतने की उम्मीद में भाजपा ने अपने क़रीब 22-24 फ़ीसद मौजूदा एमएलए को टिकट नहीं दिया है।

इस्लामपुर एसेम्बली हल्के में इसका सबसे ज़ोरदार मिसाल है। इस हल्के में जबसे ज़्यादा वोट कुर्मी जाति के हैं और फिर यादवों के। मुसलमान वोट भी ठीक तादाद में है। 2010 में यहां से जेडी-यू के राजीव रंजन राजद के वीरेंद्र गोप को हराकर जीते थे। 2013 आते-आते वे नीतीश से दूर हो गए और भाजपा के नज़दीक। जब मांझी अलग हुए तो वे मांझी के साथ चले गए। लेकिन राजीव यकीन थे कि मांझी का जो भी हो, उनका टिकट भाजपा से पक्का है।

लिहाज़ा मांझी जब भाजपा के साथ ज़ोर-आज़माइश कर रहे थे, तभी राजीव ने उनका साथ छोड़कर भाजपा का दामन इस यकीन के साथ थाम लिया कि इस्लामपुर से उनको ही पार्टी का टिकट मिलेगा। राजीव रंजन की हिसाब साफ़ थी। कुर्मी होने के नाते कुर्मी वोट उनको भी मिलेंगे। अगर जेडी-यू का उम्मीदवार इस सीट से आया तो कुर्मियों के वोट बंट जाएंगे और यादव तो नीतीश को वोट देंगे नहीं।
राजीव का मानना था कि अगर यह सीट राजद को गई और राजद ने यादव उतार दिया तो मुक़ाबला बहुत कड़ा हो जाएगा।
भाजपा के पॉलिसी साज़ों ने भी यह केमेस्ट्री समझी और उसके मुताबिक जो फोर्मूला बना, उसमें राजीव की जगह कुछ घंटे पहले राजद से भाजपा में शामिल हुए वीरेंद्र गोप को टिकट दे दिया।

इसी तरह राघोपुर के जेडी-यू एमएलए सतीश यादव को भाजपा ने उसी सीट से उतारा है। सतीश ने 2010 में राबड़ी देवी को हराया था। भाजपा की दिक़्क़त यह है कि उसके साथी क़रीब 84 सीट पर लड़ रहे हैं। साबिक़ वजीरे आला जीतन राम मांझी ने अपनी पार्टी ‘हम’ के तमाम उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिए हैं।
उन्होंने दो सीटों पर ख़ुद लड़ने की एलान कर अपनी सीटें बढ़ाकर 21 कर ली हैं। लेकिन इन 21 में से 25 फ़ीसद पर ही उनकी पार्टी की इमकानात ज़हीर की जा रही है। राम विलास पासवान ने जिन 11 सीटों पर नामों की ऐलान की है, उनमें से 3 तो उनके कुनबे से हैं और क़रीब 6 उनके पार्टी लीडरों के कुनबे से। उपेंद्र कुशवाहा ने अभी नामों की एलान नहीं की है। भाजपा के ही ज़राये मानते हैं कि ये लोग 30 फ़ीसद से ज़्यादा सीटें न जीत पाएंगे।
मुस्लिम और यादव वोट के सहारे इंतिख़ाब लड़ने वाली राजद को महज़ 22 सीटें मिली थीं।
2014 के आम इंतिख़ाब में कुछ इसी तरह का कारनामा एनडीए ने कर दिखाया और 40 में से 31 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की। लेकिन इसके बाद एसेम्बली की 10 सीटों के लिए हुए जीमनी इंतिख़ाब में जातीय फोर्मूले उभर कर सामने आए और इस इक्वेशन के सामने एनडीए को महज़ चार सीटें ही मिल सकीं। इस एसेम्बली इंतिखाब में इसी हिसाब की बुनियाद पर फॉर्मूला बनाए जा रहे हैं और भाजपा के पॉलिसी साज यहां कोई कसर किसी क़ीमत पर नहीं छोड़ना चाहते।

 

बशुक्रिया : बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम 

TOPPOPULARRECENT