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बिहार में हिंदू ही नहीं मुस्लिम खानदान की औरतें भी कर रहीं हैं छठ

पटना : मुल्क में इन दिनों जहां मजहबी बुनियादपरस्त पर बहस हो रही है और अदम बर्दाश्त के चलते लोग एवार्ड लौटा रहे हैं वहीं, महापर्व छठ पर फिरकावाराना हम आहाङी की अनोखी मिसाल देखी जा रही है। बिहार में छठ तेवहार सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि कुछ मुस्लिम भी कर रहे हैं।

गोपालगंज के बैकुंठपुर और थावे ब्लॉक में कई मुस्लिम अहले ख्नाना की औरतें छठ में रोज़ा रख रही हैं। ये औरतें पूरे नियम से छठ पूजा करती हैं। छठी मइया के गीत गाती हैं और पूजा के अमल और प्रसाद बनाने के लिए मिट्टी के चूल्हे बनाती हैं। यहां के 6 मुस्लिम अहले खाना गुजिशता कई सालों से छठ पूजा करते आ रहे हैं। जमीला खातून कहती हैं कि उसने छठी मैया से बेटे की मन्नत मांगी थी और मन्नत पूरी होने के बाद गुजिशता 16 सालों से छठ पूजा कर रही हैं। जमीला के मुताबिक छठ पूजा करने में उन्हें अहले खाना, मुस्लिम समाज समेत हिन्दू समाज का भी पूरा मदद मिलता है।

सारण जिले के रसूलपुर थाना के माधोपुर गांव के मुस्लिम अहले खाना के लोग भी छठ पूजा करते हैं। कासीम मियां की बीवी दरूदन बीवी ने कहा कि उसके अहले खाना की खातून सायराना ने बेटा होने की मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरा होने के बाद से वह छठ पूजा कर रही है। माघोपुर गांव में मुस्लिम अहले खाना के लिए छठ पूजा करने की रिवायत रही है। दरूदन कहती हैं कि पहले हमारी सास व खानदान की कई खातून छठ करती थीं।
सारण जिले के सिताब दियारा के लाला टोला में मुस्लिम खानदान करीब 70 साल से छठ कर रहे हैं। गांव के मंजूर मियां हर साल छठ के रोज़ा रखते हैं। उनकी मां उमत बीवी भी छठ पूजा करती थी। मंजूर बताते हैं कि उनके पैदाइश के वक़्त उनकी मां उमत बीवी अपने मायके शीतलपुर गांव में थी। पहले उमत बीवी के बच्चों की मौत पैदाइश के कुछ दिनों बाद ही हो जाती थी। पड़ोस की हिन्दू खातून ने उमत की तकलीफ देख छठी मैया से मन्नत मांग दी कि इस बार पैदा लेने वाला बच्चा सही सलामत रहेगा तो उमत बीवी छठ करने लगी। उस वक़्त से उमत बीवी जब तक ज़िंदा रहीं, छठ करती रहीं।

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