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बिहार हुकूमत की तनकीद पर बिफरा जदयू

मर्कज़ी दाख्ला वज़ीर सुशील कुमार शिंदे की तरफ से कानून निज़ाम के मसले पर बिहार हुकूमत की तनकीद किये जाने पर जदयू ने तीखी मुज़म्मत की है। पार्टी के रियासती तर्जुमान शरीक विधान पार्षद नीरज कुमार और तर्जुमान नवल शर्मा ने कहा है कि मर्कज़

मर्कज़ी दाख्ला वज़ीर सुशील कुमार शिंदे की तरफ से कानून निज़ाम के मसले पर बिहार हुकूमत की तनकीद किये जाने पर जदयू ने तीखी मुज़म्मत की है। पार्टी के रियासती तर्जुमान शरीक विधान पार्षद नीरज कुमार और तर्जुमान नवल शर्मा ने कहा है कि मर्कज़ी वज़ीर का बयान कबीले इतराज है। नक्सलवाद जैसे मौजू पर सियासत करने की बजाय अच्छी ज़ुबान में अपनी बात रखनी चाहिए। तर्जुमान ने कहा कि बिहार हुकूमत की मंसूबा आपकी हुकूमत, आपके तरफ मंसूबा की मर्कज़ी हुकूमत तारीफ कर चुकी है। आठ नक्सल मुतासीर रियासतों को इस प्रोग्राम का अमल करने की सलाह दी गयी। अब वे दूसरी ज़ुबान बोल रहे हैं।

कानून-निज़ाम रियासती हुकूमत का मामला है। हर रियासत अपनी जोगराफियाई, समाजी और इक़्तेसादी हालात पर अपनी पॉलिसी तय करता है। बिहार ने भी अपनी नक्सल पॉलिसी तय की है। ऐसी पॉलिसी जिसमें जहां एक तरफ रियासत में गैर बराबरी खतम करने, समाजी इंसाफ के साथ तरक़्क़ी करने, तरक़्क़ी की रोशनी समाज के आखरी सख्स तक पहुंचाने पर बल दिया गया है। दूसरी तरफ जदीद तरीके से पुलिसिंग पर भी उतना ही ताकत है। बिहार के महरूम तबके का एख्तियार और नक्सलियों की जमीनी बुनियाद और उनकी कूवत में कमी आयी है। एक वक़्त नक्सली तशद्दुद को लेकर बिहार पूरी दुनिया में सुर्खियों में रहा करता था। अब नक्सलियों की मतवाजी अदालतें नहीं लगती। बिहार का अब ऐसा कोई इलाका नहीं बचा है, जहां पुलिस नहीं पहुंच सकती। तशद्दुद रुझान के लोग कानून से डरने लगे हैं। मरकज़ को रियासत की जरूरतों के हिसाब से सीआरपीएफ की तैनाती करनी चाहिए ताकि नक्सली सरगरमियों पर और रोक लग सके।

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