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बिहार- 12वीं के रिज़ल्ट में मुस्लिम बहुल किशनगंज के 63 % स्टूडेंट्स पास

बिहार बोर्ड में कला संकाय के इंटरमीडिएट का रिज़ल्ट सिर्फ़ 37 फीसद रहा । इतना ही नहीं कला संकाय के टॉपर गणेश को फर्जीवाड़ा करने के आरोप में गिरफ्तार भी कर लिया गया है ।

लेकिन मुस्लिम बहुल इलाके किशनगंज में कला संकाय के 63 फ़ीसदी छात्र पास हुए है. और ये प्रतिशत पूरे बिहार में सबसे ज़्यादा है.
किशनगंज में कुल 7355 छात्रों ने इंटर (आर्ट ) की परीक्षा दी थी. इनमें से 4635 छात्र पास हुए. 1336 छात्रों को फर्स्ट डिवीजन मिली है जबकि 3007 छात्र सेंकेंड डिवीजन से पास हुए है.
साइंस साइड में 1553 बच्चों ने परीक्षा दी जिसमें से 996 पास हुए. वहीं, कामर्स की बात करें तो 607 बच्चों में से 548 छात्रों ने सफलता पाई.
आबादी के लिहाज से देखें तो 2011 की जनगणना के मुताबिक किशनगंज की आबादी 1,690,948 है जिसमें से 68 फ़ीसदी आबादी मुस्लिम समाज की है. ये आर्थिक सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर पिछ़ड़ी हुई है.

अब बात साक्षरता दर की बात करें तो ये 57 फ़ीसदी है. किशनगंज के लिए स्टूडेंट्स की ये उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि ये भारत के पिछड़े ज़िलों में से एक है.

सामाजिक कार्यकर्ता चित्राली चार साल से किशनगंज में लड़कियों की शिक्षा को लेकर ज़िले के दो ब्लाक बहादुरगंज और कोचाधामन में काम कर रही है. चित्राली बताती हैं कि , “बीते कुछ सालों में सरकारी योजनाओं ने किशनगंज पर ध्यान दिया है. साथ ही मुस्लिम समाज में चेतना बढ़ी है कि उनके यहां के बच्चे भी पढ़ें और मुख्यधारा में शामिल हों.”.

किशनगंज में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग इसे उपलब्धि के तौर पर देख रहे है. मारवाड़ी कालेज, किशनगंज में हिन्दी के विभागाध्यक्ष सजल प्रसाद कहते हैं, ” हमारे लिए बहुत ख़ुशी की बात है कि इतने बुरे दौर में भी हमनें बहुत अच्छा परफॉर्म किया है.”

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मोहम्मद अब्दुल हफीज इलाके के पिछड़े होने के सवाल पर कहते हैं कि “पिछड़ा है तो क्या उठेगा नहीं. पिछड़ा है तो हालात बदलने की कोशिश भी करेगा और किशनगंज भी कर ही रहा है. वैसे भी पिछड़ा क्या होता है, हमारे देश में तो यूपीएससी टॉपर भी अब पिछड़े समाज से आ रहे हैं.”

लेकिन किशनगंज के स्टूडेंट्स को मिली कामयाबी पर बीजेपी को एतराज़ है । बीजेपी नेता सुशील मोदी ने प्रेस नोट जारी करके किशनगंज के पास प्रतिशत को लेकर सवाल उठाए है.

मोदी ने कहाकि “सरकार बताए कि बिहार के सबसे पिछड़े ज़िले किशनगंज में इंटर आर्ट्स में 63. 46 प्रतिशत को बगल के अररिया में 24 प्रतिशत छात्र ही क्यों पास हुए?”

इंटर आर्टस में नालंदा का रिज़ल्ट 24 फ़ीसदी, पटना का 34 फ़ीसदी रहा जबकि वैशाली जिले के नतीजे सबसे खराब रहे जहां सिर्फ 11.55 फ़ीसदी बच्चे ही पास हुए.

सुशील कुमार मोदी ने जो सवाल उठाएं उन्हें और मज़बूत करते हैं बिहार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एके पी यादव । ए के पी यादव कहते हैं कि “किशनगंज बहुत पिछड़ा ज़िला है वहां जब इस तरह का रिजल्ट आता है तो उनके दो मायने निकाले जा सकते हैं. पहला तो ये कि या तो वहां एडमिनिस्ट्रेशन ने सख्ती नहीं बरती और नकल हुई. दूसरा ये हो सकता है कि कॉपियों की बारकोडिंग ना हुई हो. अब किशनगंज की कॉपियों की बारकोडिंग हुई है या नहीं, ये बोर्ड बता सकता है.”

लेकिन बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर से जब किशनगंज की परफारमेंस को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहाकि “अभी तक बोर्ड ने ज़िला स्तर पर रिज़ल्ट की समीक्षा नहीं की है, समीक्षा जब गहन स्तर पर होगी तभी कुछ कह पाना संभव होगा.”

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