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बीजेपी की तशहीर गाड़ी से अज़ान की अावाज़

बिहार के बेगूसराय में जुमा सुबह लोग हैरान थे. पास से गुजरने वाली एक जीप से अज़ान की आवाज़ आ रही थी. लोगों ने मुड़कर देखा तो इस जीप पर भारतीय जनता पार्टी के झंडे लगे हुए थे. यह तो समझ में आ गया कि यह इंतिखाब तशहीर में लगी गाड़ी है. पर, यह भाजपा के तशहीर की गाड़ी थी, इसलिए लोगों की बेताबी और भी बढ़ गई. जुमेरात को नवादा में वज़ीरे आज़म नरेंद्र मोदी ने इन्तखाबी इजलास में दादरी मुद्दे पर मुंह खोला और इसके बाद पार्टी के इश्तेहार के सुर ही बदल गए.
अब न तो साक्षी महाराज, न गिरिराज सिंह और न ही योगी आदित्यनाथ के बयान आ रहे हैं.
पार्टी के इंतिखाब तशहीर में लगी गाड़ी से शंख और अज़ान की आवाज़ आ रही है. गीता की बात हो रही है और क़ुरान की बात हो रही है.

यह सब कुछ बस एक दिन में ही हो गया. नवादा इंतिख़ाबी इजलास में मोदी ने हिंदुओं और मुसलामानों से आपस में लड़ने की बजाय ग़रीबी से लड़ने का एलान किया था. भागलपुर के बुनकरों को ‘मोदी से परहेज़ नहीं’ मोदी ने नवादा से पहले मुंगेर और बेगूसराय में हुई अवामी इजलास में अपने सियासी मुखालिफत पर तीखे हमले किए थे.

बहरहाल सदर प्रणब मुख़र्जी का बयान रंग लाया और कई दिनों से बिहार में चल रही सियासी बयानबाज़ी पर वज़ीरे आज़म ने अपनी चुप्पी तोड़ी. मोदी के बयान का असर फ़ौरन कारकुनान पर भी दिखने लगा. ऐसा लगा कि सब कुछ अचानक बदल गया हो.

भाजपा के कारकुनान श्यामनंदन सिंह उसी इश्तेहार गाड़ी पर सवार थे, जब मैंने उनसे पूछा कि आख़िर यह सब कुछ कैसे हुआ? उन्होंने कहा, “सुना नहीं, मोदी जी ने कल नवादा में क्या कहा?. आज से सब बदल गया है. ग़रीब का कोई मज़हब होता है क्या? ग़रीबी के ख़िलाफ़ लड़ना है. सबको मिल जुलकर लड़ना है.” सियासी ताज़िज़िया अचानक इस बदलाव से हैरत में हैं. वे कह रहे हैं कि हो सकता है कि वज़ीरे आज़म पर सदर के बयान का ही असर हुआ हो. यह भी हो सकता है कि नीतीश कुमार के उस ट्वीट का असर हुआ हो, जिसमें उन्होंने मोदी को राजधर्म की बात याद दिलाई थी.
वजह जो रहा हो, भाजपा के इश्तिहार की गाड़ियों से अब मोहब्बत ही बरस रही है.

 

बा शुक्रिया बीबीसी डॉट हिंदी 

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