Wednesday , September 20 2017
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बीजेपी की सरकार में एक बार फिर सिर उठाता ‘बोडो आंदोलन’

गुवाहाटी। भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में अलग बोडोलैंड के गठन की मांग में आंदोलन नए सिरे से सिर उठा रहा है। इससे राज्य में बीजेपी के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की सरकार की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।

असम में बीजेपी की अगुवाई में सर्वानंद सोनोवाल की सरकार को सत्ता संभाले अभी छह महीने भी नहीं बीते हैं। बीते विधानसभा चुनावों में पार्टी ने बोडो गुटों के साथ हाथ मिलाया था। लेकिन अब विभिन्न बोडो संगठनों ने बीजेपी सरकार पर राजनीतिक साजिश रचने का आरोप लगाते हुए आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। इसके तहत सोमवार को निचले असम के बोडोबहुल उदालगुड़ी स्टेशन पर पहुंचे हजारों बोडो आंदोलनकारियों ने ट्रेनों की आवाजाही ठप कर दी। आंदोलन के पहले चरण में इन संगठनों ने 12 घंटे के रेल रोको की अपील की थी।

इस आंदोलन की वजह से ट्रेन सेवाएं अस्त-व्यस्त हो गईं और देश के बाकी हिस्सों से उत्तरी असम का रेल संपर्क कटा रहा। अखिल बोडो छात्र संघ (आब्सू), नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट आफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) और पीपुल्स ज्वायंट एक्शन कमिटी फॉर बोडोलैंड समेत विभिन्न संगठनों ने अलग राज्य की मांग में नए सिरे से आंदोलन का फैसला किया है। रेल रोको आंदोलन के दौरान 20 हजार से ज्यादा लोग मौके पर पहुंच गए। वे नो बोडोलैंड नो रेस्ट के नारे लगा रहे थे। उनका कहना था कि बोड़ो तबके के लोगों के साथ अब कोई भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस मौके पर आब्सू अध्यक्ष प्रमोद बोडो ने दशकों पुरानी अलग राज्य की मांग के प्रति बेरुखी का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार की भेदभावपूर्ण नीति के लिए उसकी खिंचाई की। उनका आरोप है, “केंद्र व अब राज्य की सत्ता में आने के बावजूद बीजेपी के अच्छे दिन का नारा महज कागजी साबित हो रहा है।” आब्सू नेता ने केंद्र को चेतावनी देते हुए कहा, “हम अब कोई राजनीतिक साजिश बर्दाश्त नहीं करेंगे।” इन संगठनों ने जातीय बोडो लोगों की सुरक्षा व अधिकार सुनिश्चित करने और एक संयुक्त बोडो राष्ट्र की मांग की है। उनका आरोप है कि बोडोलैंड मसले के समाधान का झूठा वादा कर एनडीए सरकार सत्ता पर काबिज हुई थी।

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