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बीजेपी मंदिर-मसजिद के नाम पर फसाद फैला रही है : दीपंकर

पटना : भाजपा और आरएसएस लो इंटेंसिटी को नहीं, अब हाइ इंटेंसिटी को हवा दे रही है। भाजपा और आरएसएस एक बार फिर मंदिर-मसजिद का मुद्दा उठा रहा है। मंदिर-मसजिद के नाम पर मुल्क अब कोई फसाद बरदाश्त नहीं करेगा।

ये बातें जुमेरात को भाकपा-माले के क़ौमी जेनरल सेक्रेटरी दीपंकर भट्टाचार्य ने कही। वे भारतीय डांस और आर्ट मंदिर मुक्ताकाश मंच में पार्टी की तरफ से ‘मेंडेंट 2015 वामपंथ की किरदार’ मौजू पर मुनक्कीद अवामी कन्वेंशन में चीफ़ स्पीकर के तौर में बोल रहे थे। अवामी कन्वेंशन में उन्होंने वाम पार्टियों को बिहार को मजबूत बनाने का मुश्तरका अहद दिलाया। उन्होंने कहा कि एसेम्बली में माले के एमएलए आवाम का हक़ रखेंगे और वामपंथी को पूरे बिहार में फैलायेंगे। भाकपा-माले ने बिहार के तरक़्क़ी के लिए 21 नुकाती ओपशनल अजेंडा तय किया है।

माले ने सिर्फ अजेंडा ही नहीं बनाया है, बल्कि इस पर अमल भी करेगी। अपने अजेंडे पर हम बिहार में एपिसोड तहरीक चलायेंगे। चलायेंगे। बिहार इंतिख़ाब ने मुल्क को यकीन दिलाया है कि वह भाजपा या आरएसएस के फिरकवाराना अजेंडे को नहीं चलने देगा। बिहार इंतिख़ाब में जीत दर्ज कर नरेंद्र मोदी यूपी और बंगाल पर कब्जा करने निकले थे, बिहार ने उनके इस मुहिम पर ब्रेक लगाने का काम किया है।

उन्होंने साफ-साफ कहा कि कुछ पार्टियां इंतिख़ाब को ही सब-कुछ समझ लेती है। इंतिखाब को ही सियासी पैमाना मान लेने से अक्सर परेशानी होती है। भाजपा की तरह वाम ब्लॉक को यह परेशानी न झेलनी पड़े, इसके लिए अभी से ही हमें अवाम की मसायलों को ले कर आवाज बुलंद करनी होगी।

वे लालू प्रसाद और नीतीश कुमार को भी कटघरे में खड़ा करने से नहीं चूके। उन्होंने कहा कि लालू जी नयी हुकूमत को ‘मंडल-टू सरकार’ कह रहे हैं। बिहार में ‘मंडल-वन सरकार’ का सूबे को एक्सप्रिरियंस रहा है। मंडल कमीशन ने सिर्फ रिज़र्वेशन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और इक़्तेसादी ताक़त देने की भी सिफारिश की थी। लालू जी के ‘मंडल-वन सरकार’ में गरीबों का रियासत नहीं बना। क्या ‘मंडल-टू सरकार’ में भी यही हाल नहीं होगा? माले चुप नहीं बैठेगी, वह ज़मीन सुधार, तालीम, तरक्की और बेरोजगारी का लड़ाई लड़ेगी। आज नीतीश कुमार एक बार फिर ‘इंसाफ के साथ तरक़्क़ी’ का नारा दे रहे हैं। एक अप्रैल, 2016 से उन्होंने शराब बंदी की ऐलान की है। इस एलान में आखिर उन्हें इतना वक्त क्यों लग गया? उनकी इस एलान पर भाकपा-माले नजर रखेगी। अवाम को इंसाफ दिलाने की मांग को ले कर पार्टी रियासती हस्ताक्षर मुहिम चलायेगी। जनवरी, 2016 में पार्टी सीएम को मेमोरेंडम सौंपेगी। भाकपा-माले ज़मीन सुधार, ज़ीराअत तरक़्क़ी और रोजगार के सवाल पर मुसलसल तहरीक करेगी।

कन्वेंशन में भाकपा-माले एमएलए दल के लीडर महबूब आलम, एपवा की क़ौमी नायब सदर भारती एस कुमार, माकपा के अरुण मिश्रा, सीपीआई के अखिलेश कुमार, किसान लीडर राजा राम, परमानंद पाल, माले के रियासती सेक्रेटरी कुणाल, धीरेंद्र झा और रिटाइर्ड लेफ्टिनेंट जनरल यूएसपी सिन्हा ने भी अपनी-अपनी बातें रखी।

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