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बुलंद हौसला,मुनज़्ज़म मंसूबा बंदी और ख़ुद‍-एतेमादी से तरक़्क़ी की राहें कुशादा

हैदराबाद 27 नवंब: तालिबे इल्म में एतेमाद पैदा हो तो वो कठिन से कठिन मंज़िल तए करसकता है। मादरी ज़बान उर्दू वाले तबक़ा में एहसासे कमतरी ज़्यादा होती है। इस को ख़त्म करने के लिए हौसलामंदी हो तो ख़ुद‍-एतेमादी के ज़रीये तरक़्क़ी की राहें हमवार होंगी।

इन ख़्यालात का इज़हार आमिर अली ख़ां न्यूज़ एडीटर रोज़नामा सियासत ने महबूब हुसैन जिगर हाल अहाता सियासत में चार रोज़ से जारी उर्दू एक्सपो : उर्दू है जिसका नाम के इख़तेतामी जलसे में इनामात तक़सीम करते हुए कर रहे थे।

उन्होंने तलबा के मुज़ाहरे की सताइश की और उर्दू ज़बान और इस के तलफ़्फ़ुज़ को जिस अंदाज़ में तलबा पेश कर रहे हैं, इस को मिसाली क़रार दिया। उर्दू ज़बान के मुस्तक़बिल के मुताल्लिक़ जो डर पाए जाते हैं , इस को नई नसल के ये नन्हे और होनहार तलबा दरख़शां और ताबनाक साबित कर रहे हैं।

तेज़-रफ़्तार तरक़्क़ी के इस दौर में उर्दू ज़िंदगी के हर शोबे में एहमियत रखती है। उर्दू ज़बान मुल्क में यक़ीनन मुसलमानों जैसा है जो हाल मुस्लमान का है, वही हाल उर्दू का है, लेकिन इस के लिए साबित क़दमी के साथ मुनज़्ज़म मंसूबा बंदी से काम अंजाम देना चाहीए।

सेंट्रल पब्लिक हाई स्कूल खिलवत के ज़ेरे एहतेमाम इदारा-ए-सियासत के बाहमी इश्तिराक से ये उर्दू एक्सपो में 56 स्कूली तलबा-ओ- तालिबात ने हिस्सा लिया। मुख़तार अहमद फरदीन सदर ऑल इंडिया मास कम्यूनीकेशन सोसाइटी ने उर्दू के बेहतरीन मुक़र्रर को 1,000/- रुपये और 5,000/- रुपये नक़द रुकमी इनामात अता किए। तक़ी, मुहम्मद अली रफ़त ने एज़ाज़ी मेहमान की हैसियत से शिरकत की। इस चार रोज़ा उर्दू एक्सपो में सैंकड़ों महबान उर्दू ने शिरकत की और इस की ख़ूब तारीफ की।

जहां-जहां उर्दू बोली और समझी जाती है, इन तक एसे प्रोग्राम के ज़रीये पयाम पहुंचाया जा सकता है। मैं उर्दू हूँ के उनवान पर एक तालिबा सुमय्या की तक़रीर में उर्दू की मुकम्मिल तारीख़, हाल को इस तरह पेश किया गया जिसमें तमाम शोबों का अहाता हो सकें। उर्दू के मुंख़बा शारा-ए-में अमीर खुसरो, क़ुली क़ुतुब शाह, मीर तक़ी मीर, मिर्ज़ा ग़ालिब , अल्लामा इक़बाल , अमजद हैदराबादी, मजरूह सुलतानपुरी, नज़ीर अकबराबादी , बाबाए उर्दू मौलवी अबदुलहक़ , मौलाना आज़ाद, सर सय्यद अहमद ख़ां , डॉ ज़ाकिर हुसैन, प्रेम चंद, इबन सफ़ी को तमसीली तौर पर पेश करना मस्हूर कुन मुज़ाहरा था और उनके लिए मुताल्लिक़ मालूमात फ़राहम करना गोया उर्दू ज़बान के तारीख़ को नई नसल में मुंतक़िल करने का बेहतारी ज़रीया रहा।

इदारा-ए-सियासत स्कूल इंतेज़ामीया और असातिज़ा के साथ तमाम तलबा की हौसला-अफ़ज़ाई किया। मोमेंटोज़ और सर्टीफ़िकेट अता किए।

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