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बेकार पड़े हैं शहरी तरक़्क़ी के 370 करोड़

शहरों के तरक़्क़ी के लिए हुकूमत की तरफ से दी गयी रकम बेकार पड़ी हुई है। गुजरे 12 सालों के दौरान रियासत के तमाम नगर निकायों ने शहरी तरक़्क़ी के लिए अलग-अलग मद में मिले 370 करोड़ रुपये को पीएल अकाउंट में डाल कर छोड़ दिया है। यह रकम शहरी नि

शहरों के तरक़्क़ी के लिए हुकूमत की तरफ से दी गयी रकम बेकार पड़ी हुई है। गुजरे 12 सालों के दौरान रियासत के तमाम नगर निकायों ने शहरी तरक़्क़ी के लिए अलग-अलग मद में मिले 370 करोड़ रुपये को पीएल अकाउंट में डाल कर छोड़ दिया है। यह रकम शहरी निकायों को रियासत हुकूमत ने मुखतलिफ़ मंसूबों के नफाज के लिए दी थी।

रकम से शहरी गरीबों के मकान की तामीर, स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार मंसूबा का नफाज, सड़क और नाली की तामीर और दीगर शहरी सहूलतों को पूरा किया जाना था। कई निकायों ने ठेकेदारों को दी जाने वाली सिक्यूरिटी डिपोजिट को भी पीएल अकाउंट में ही जमा छोड़ दिया है। मंसूबा के नफाज के लिए रकम की इंखिला आज तक नहीं की गयी है।

सबसे आगे धनबाद

रियासत के तमाम बड़े शहरों में बनाये गये मुंसिपल कॉर्पोरेशन तरक़्क़ी के लिए दी गयी रकम खर्च नहीं करने में नंबर वन हैं। सबसे ज्यादा धनबाद मुंसिपल कॉर्पोरेशन ने 49.47 करोड़ रुपये पीएल अकाउंट में जमा कराये हैं। देवघर मुंसिपल कॉर्पोरेशन ने 30.05 करोड़ और रांची मुंसिपल कॉर्पोरेशन ने 22.57 करोड़ रुपये पीएल अकाउंट में रख छोड़ दिये हैं। जमशेदपुर मुत्ताला इलाक़े ने भी 39.72 करोड़ रुपये पीएल अकाउंट में जमा करा रखा है। दुमका नगर परिषद ने भी 35.72 करोड़ रुपये खर्च करने की जगह पीएल अकाउंट में डाल रखा है। इधर, शहर तरक़्क़ी महकमा के तहत रांची इलाकाई तरक़्क़ी इख्तियार (आरआरडीए) ने भी मुखतलिफ़ मंसूबों के मद में हासिल रकम पीएल अकाउंट में रख छोड़ा है। आरआरडीए के पीएल अकाउंट में 17 करोड़ रुपये जमा है।

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