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बेगुनाहों के खून का रंग भूल मोदी की खुशामद करने में जुटे कुछ मुस्लिम ग्रुप, लिखी बायोग्राफी

कोई वक़्त था जब दुनिया पर सच का बोलबाला था और लोग सिर्फ सच्चे इंसान का ही साथ देते थे और उससे बोलचाल रखते थे लेकिन आज ज़माना कुर्सी का है। आज की दुनिया में ज़्यादातर लोग चढ़ते सूरज को सलाम करने की कहावत में यकीन करते हैं। कुछ ऐसा ही हाल होता जा रहा है अपने नियम, जुबां और इरादों के पक्केपन के लिए जाने जाने वाले मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों का। देश के किसी भी मुसलमान से अगर आप पूछेंगे कि देश के मौजूदा प्रधानमंत्री के बारे में उनका क्या विचार है तो उनमें से बहुत ही काम होंगे जिनके दिल में नरेंद्र मोदी को लेकर नाराज़गी नहीं होगी और नाराज़गी की वजह भी जग जाहिर ही है।

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लेकिन ऐसे में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो जन्में तो मुस्लिम मजहब में हैं लेकिन दिल से न तो वो मुसलमान हैं और न ही उनके दिलों में अपने मुस्लिम भाइयों के लिए कोई प्यार है। ऐसे ही लोग हैं जो जब अपने मजहब के लोगों को हक़ और इन्साफ दिलाने की बारी आती है तो यह विरोधियों के साथ खड़े हो अपने ही लोगों से जाने किस गुनाह का बदला लेने लगते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ है अलीगढ में जहाँ एक मुस्लिम समुदाय ने देश के प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर एक स्कालरशिप प्रोग्राम शुरू किया है।

इस स्कालरशिप प्रोग्राम के तहत गरीबी रेखा के नीचे रहरहे लोगों के बच्चों को पढ़ने के लिए स्कालरशिप मुहैय्या करवाई जाएगी। बात सिर्फ इतनी ही नहीं है, इस मुस्लिम ग्रुप ने मोदी के जीवन पर एक बायोग्राफी लिखकर भी उन्हें भेंट की है और मोदी की तरफ से शुरू किए “मन की बात” प्रोग्राम के ऊपर भी एक किताब लिखी है जो जल्द ही बाज़ारों में उपलब्ध होगी।

ऐसी ख़बरों के सामने आने से जहाँ मुस्लिम समुदाय में अलीगढ के इस मुस्लिम ग्रुप के लिए गुस्सा भरा पड़ा है वहीँ कुछ लोग ऐसे लोगों को घर का भेदी बता रहे हैं।

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