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बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को मुआवजा देने की सिफारिश

यूनियन कैबिनेट (मरकज़ी काबीने) ने पार्लियामेंट में पेश किए जाने के लिए National Commission for Minorities की वह रिपोर्ट कुबूल कर ली है जिसमें सभी दंगा के मुतास्सिरो को एक बराबर मुआवजा देने और साथ ही दहशतगर्द से जुड़े मामलों में गलत ढंग से फंसाए गए मुस्लि

यूनियन कैबिनेट (मरकज़ी काबीने) ने पार्लियामेंट में पेश किए जाने के लिए National Commission for Minorities की वह रिपोर्ट कुबूल कर ली है जिसमें सभी दंगा के मुतास्सिरो को एक बराबर मुआवजा देने और साथ ही दहशतगर्द से जुड़े मामलों में गलत ढंग से फंसाए गए मुस्लिम नौजवानों को मुआवजा देने की सिफारिश की गई है |

हुकूमत ने जुमेरात के रोज़ National Commission for Minorities की साल 2010-11 की 18वीं सालाना रिपोर्ट की एक्शन टेकेन रिपोर्ट (एटीआर) पर आगे बढ़ने की हामी भरी है | इसमें इस साल Minority Affairs Minister ने एक नोट जोड़ा है | अपनी सिफारिश में National Commission for Minorities के उस् वक्त के चीफ मुहम्मद शफी कुरैशी ने कहा था कि पुलिस अकादमी और पुलिस हेडक्वार्टर की तरफ से वक्तन फवक्तन लेक्चर, वर्कशाप्स और सेमिनार मुनाकिद करके पुलिस को अक्लीयतो के लिये बेदार किया जाना चाहिए |

उनके मुताबिक दहशतगर्द से जुड़े मामलों में मुस्लिम नौजवानो की गिरफ्तारी से मुस्लिम फिर्के में अदम तहफ्फुज़ ( Insecurities) का जज़बा पैदा हो गया है | जो मुतास्सिरा बेगुनाह पाए जाते हैं और अदालतों से बरी हो जाते हैं उन्हें बहाल किया जाना चाहिए और हर्जाना भी दिया जाना चाहिए | इसी तरह सभी दंगा के मुतास्सिरो के लिए यकसा मुआवजा पालीसी होनी चाहिए, वे चाहे जिस फिर्के या जाति के हों |

रिपोर्ट में मालेगांव ब्लास्ट मे मुतास्सिरो के मामले की खुसूसी अदालत की तरफ से जल्दी सुनवाई करने और गिरफ्तार किए गए बेगुनाह लोगों को रिहा करने की सिफारिश भी की गई है | इसके इलावा यह भी कहा गया है कि जिन पुलिस अहलकारो ने अपने फर्ज़ का अमल ईमानदारी से नहीं किया उनके खिलाफ कार्रवाई भी शुरू की जानी चाहिए |

National Commission for Minorities ने यह रिपोर्ट हुकूमत को 2012 में सौंपी थी | कमीशन के मौजूदा सदर वजाहत हबीबुल्ला ने कहा कि ऐसे मामलों में कार्रवाई करते वक्त बचाव के लिए कुछ सिफारिश की गई हैं जिनसे पुलिस कार्रवाई के ताल्लुक में अक्लीयतो की फिक्र दूर की जा सकती है , हालांकि, वज़ारत ए दाखिला का मानना था कि जो दहशतगर्द के मुल्ज़िम हैं उन्हें कानूनी राहत पाने के लिए आईन में मुनासिब इक्दामात पहले से ही मौजूद हैं |

कैबिनेट की बैठक के बाद अक्लीयतो के मामलों के वज़ीर रहमान खान ने कहा कि वज़ारत ए दाखिला को कमीशन की रिपोर्ट पर कोई ऐतराज़ नहीं है | उसने अपनी कुछ खदशात जरूर जताए थे जिनका हल कर दिया गया है | उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने इस रिपोर्ट को पार्लियामेंट में पेश करने और उस पर आगे की कार्रवाई के लिए कुबूल कर लिया है | कैबिनेट के इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार का वह फैसला फिर से चर्चा में आ सकता है जिसके तहत उसने दहशतगर्द मामलों में फंसे बेगुनाह मुस्लिम नौजवानो को राहत देना शुरू किया था | यूपी हुकूमत की इस पालिसी पर पहले हाईकोर्ट ने ऐतराज़ जताया, फिर सुप्रीम कोर्ट ने |

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