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बेटियाँ नहीं तो बेटे कहाँ से आएंगे: मर्कज़ी वज़ीर कृष्णा तीरथ

हैदराबाद, 7 फरवरी- मर्कजी ममलकती वज़ी बराए तरक़्की ख़्वातीन व अतफ़ाल कृष्णा तीरथ ने मर्दुम शुमारी में बेटियों की घटती तादाद पर फिक्रमंदी का इज़हार करते हुए समाज से सवाल किया कि जब बेटियाँ ही नहीं होंगी तो फिर बेटे कहाँ से आएंगे?

हैदराबाद, 7 फरवरी- मर्कजी ममलकती वज़ी बराए तरक़्की ख़्वातीन व अतफ़ाल कृष्णा तीरथ ने मर्दुम शुमारी में बेटियों की घटती तादाद पर फिक्रमंदी का इज़हार करते हुए समाज से सवाल किया कि जब बेटियाँ ही नहीं होंगी तो फिर बेटे कहाँ से आएंगे? उन्होंने एलान किया कि देश के 100 ज़िलों में बहुत जल्द ख्वातीन के लिए वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर (ओएससीसी) क़ायम किये जाएंगे, जहाँ सेहत व तिब, कानूनी, नफसियाती इमदाद मुहैया करायी जाएगी। ख़्वातीन के खिलाफ बढ़ती हैवानियत को कम करने के लिए उन्होंने मज़हबी और सियासी क़ाइदीन को आगे आने की अपील की।
कृष्णा तीरथ आज यहाँ आठ रियासतों से आये ओहदेदारों और ग़ैर सरकारी इदारों के नुमाइंदों के साथ लड़ाकों के म़ुकाबले में लड़कियों की घटती तादादा में सुधार के लिए नेशनल प्लान ऑफ एक्शन फॉर इप्रूविंग चाइल्ड सेक्स रेशियो पर इल़ाकाई सलाह व मशविरा बैठक से खिताब कर रही थीं। उन्होंने कहा कि मर्कजी हुकूमत ने क़ौमी सतह पर ख़्वातीन को एक ही जगह पर कई तरह की सहूलतें मुहैया कराने के म़कसद से ओएससीसी केंद्रों की स्थापना की योनजा बनाई है। आइंदा अप्रैल माह में इस ताल्ल़ुक से रियासती हुकूमतों को भी एलामिया जारी किया जाएगा। किसी भी तरह के मज़ालिम पर ख्वातीन सीधे ओएससीसी से राबता कर सकती है, जहाँ तिब्बी सहूलतें, एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस अफसर, कानूनी इमदाद के लिए वकील और नफसियाती सलाह व मशविरे के लिए स्पेशलिस्ट मौजूद होंगे।
कृष्णा तीरथ जज्बाती अंदाज़ में कहा कि जब मांगना है देवियां याद आती है, लेकिन घर में उसी देवी जैसी बेटी के लिए इन्कार है। बेटियों के खिलाफ मन्फी नज़रिये वज्स से हालात काफी भयानक होते जा रहे हैं। इस स्थिति में औरतों की मदद के लिए मर्कजी हुकूमत `अहिंसा मैसेंजर्स’ की स्कीम शुरू की है, जिसमें 12 लाख म़ुकामी नुमाइंदों के अलावा आंगनवाड़ी वर्कर और रिटायर्ज लोग भी शामिल किये जाएंगे।
कृष्णा तीरथ ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सभी रियासती हुकूमतों को हिदायत दी है कि पीसी एण्ड पीएण्ड टी एक्ट पर कड़ाई से अमल करें। उन्होंने कहा कि पिछले 6 दहों में देश के 27 रियासतों और मर्कज के जेरे असर इल़ाकों में लड़कों के म़ुकाबले मं लड़कियों की तादाद घटी है। जिनमें हरियाना, पंजाब, जम्मू कश्मीर और दीगर रियसतों की हालत काफी खराब है।
जहाँ यह शरह 22 से 82 पाइंट घटी है।
ख़्वातीन में नाख्वांदगी, बचपन में शादी, दहेज, ग़रीबी समाजी व मआशी तौर पर कमज़ोरी इन हालात के लिए जिम्मेदार है।
रियासती वज़ीर सुनिता लक्ष्मा रेड्डी, मर्कजी हुकूमत की एडिशनल सेक्रेटरी और मिशन की डायरेक्टर रत्ना प्रभा ने भी इस म़ौके पर मौजूद थीं, उन्होंने कहा कि बेटी है तो दुनिया है, बेटी के बग़ैर दुनिया के बारे में सोचा नहीं जा सकता।

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