Tuesday , October 24 2017
Home / Crime / बे यार-ओ-मददगार मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारियां

बे यार-ओ-मददगार मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारियां

शहर में फ़िर्का वाराना फ़सादात और तशद्दुद के वाक़ियातके पस-मंज़र में जारी मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारियां मुस्लिम समाज में बेचैनी का बाइस बन गई हैं । ताहम उन गिरफ़्तारीयों के पसेपर्दा कार्यवाइयां और सियासी दाउ पेज मुस्लिम स

शहर में फ़िर्का वाराना फ़सादात और तशद्दुद के वाक़ियातके पस-मंज़र में जारी मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारियां मुस्लिम समाज में बेचैनी का बाइस बन गई हैं । ताहम उन गिरफ़्तारीयों के पसेपर्दा कार्यवाइयां और सियासी दाउ पेज मुस्लिम समाज के लिए लम्हा फ़िक्र बन गई है । एक तरफ़ पुलिस का मुआनिदाना रवैय्या और दूसरी तरफ़ मुखबिरों की साज़िशें और तीसरी तरफ़ जो बीज बच्चाउ का रास्ता समझा जाता है वो सियासी रास्ता साज़िशियों का पुलंदा बन गया है और इस सियासी रास्ते से उन्हें मदद मिल रही है जैसे सियासी जमात चाहती है । इतना ही नहीं मुस्लिम नौजवानों को पुलिस की हरासानी और गिरफ़्तारीयों से बचने के लिए सियासी जमात के शराइत और कई मराहिल में कामयाब होना पड़ रहा है ।

एक तरफ़ मुखबिरों और पुलिस की हरासानी और उद्यत से बचने के लिए परेशान मुस्लिम नौजवान सियासी जमात के शराइत से बेहाल होरहे हैं । बावसूक़ ज़राए के मुताबिक़ शहर की सियासी जमात के ताल्लुक़ से मशहूर है कि वो पुलिस के ज़रीया ऐसे मौक़ों पर अपने मुख़ालिफ़ीन से मुखबिरों जैसी पालिसी अपनाते हुए पुरानी ख़ुसूमत निकाल लेती है । अब शहर की इस सियासी जमात से पुलिस मज़ालिम से बचने के लिए रुजू होने वालों को नए शराइत पर खरा उतरना ज़रूरी हो गया है ।

जब छोटी सी जमात के बड़े क़ाइद से मसला को रुजू किया जाता है और पुलिस मज़ालिम का तज़किरा और गिरफ़्तारी से बचाने की फ़र्याद की जाती है तो पहले इस मुस्लिम नौजवान को मुताल्लिक़ा इलाक़ा के लोकल लीडर से रुजू करदिया जाता है जहां इस नौजवान को सियासी जमात से वाबस्तगी और इस के हमदरद होने होने का सदाक़त नामा लाना पड़ता है फिर बाद में जब जाकर कहीं इस नौजवान को बचाने की कोशिशों का आग़ाज़ होता है लेकिन जब इस नौजवान को लोकल लीडर ना कह दे तो फिर इस पर अपनों की आफ़त टूट पड़ती है ।

नतीजा वो जेल की सऊबतें बर्दाश्त करे या फिर फ़ैसल की तरह बच्चाउ की कोशिश में अपनी जान दे दे । ना जाने ऐसे कितने ख़ानदान हैं जो इन दिनों ऐसी परेशानीयों का शिकार हैं । पुलिस में पाए जाने वाले फ़सताई ज़हनीयत के ओहदेदार-ओ-मुलाज़िम तो मौक़ा की तलाश में रहते हैं और रही सही कसर पुलिस के मुख़्बिर पूरी कर देते हैं । जो इन फ़सादात के औक़ात और साबिक़ पुलिस की गिरफ़्तारीयों के दौरान अपने घर में साल भर का राशन जमा करलेते हैं ।

परेशानी के दौर में ख़ुशहाल रहने वाला मुख़्बिर तबक़ा इन दिनों सरगर्मीयों से ख़ुश हैं और उन को रास्त मुतास्सिरा इलाक़ा में इन पुलिस स्टेशन में गुज़ार रहा है जो ना सिर्फ नौजवानों की निशानदेही कर रहे हैं बल्कि ख़ुद पुलिस को मकानात का डोर नंबर फ़राहम कर रहे हैं । लेकिन अफ़सोस कि पुलिस और मुखबिरों की इन सरगर्मीयों से बचने का मुस्लिम नौजवानों के यहां कोई रास्ता नहीं बल्कि ख़ुद अपने समझे जाने वाले और अपना कहने वाले दावेदारों की शराइत उन्हें ग़ैरों के ज़ुलमसे ज़्यादा परेशान कर रही हैं । अपनी मर्ज़ी से तबादला और पोस्टिंग दिलाने का इख़तियार रखने के दावेदार सियासी जमात के क़ाइदीन का रवैय्या मुस्लिम समाज के लिए परेशानीयों में इज़ाफ़ा का बाइस बना हुआ है ।

एक आला पुलिस ओहदेदार इन दिनों मंदिरों में मंदिरों में गोश्त डालने वाले हिन्दू नौजवानों की गिरफ़्तारी को नजर अंदाज़ करदेने की पुलिस के अपने मातहत मुलाज़मीन को हिदायत दी है । सिटी पुलिस के आला ओहदे पर फ़ाइज़ इस ओहदेदार पर ऐसे इल्ज़ामात हैं कि इस ने ख़ुद अपनी मौजूदगी में कई हिन्दू नौजवानों को रिहा करदिया जो मनादिर में गोश्त डालने और फ़साद भड़काने का मूजिब बने इतना ही नहीं ख़ुद इस ओहदेदार ने मातहत ओहदेदारों को हिदयत दी है कि वो मुस्लिम नौजवानों की ज़्यादा से ज़्यादा तादाद को गिरफ़्तार करे । ऐसे मौक़ों पर गिरफ़्तार अफ़राद की रूडी शीट खोल दी जाती है जो उस की ज़िंदगी की तबाही में बुनियादी किरदार अदा करती है ।

शहरीयों में ये रुजहान पाया जाता है कि क्या छोटी सी सियासी जमात के बड़े क़ाइदीन के इलम में ये बात नहीं कि इस ओहदेदार को ऐसी हरकत से रोका जाय । जबकि वक़्त के कमिशनर को साबिक़ में अपनी ज़िद और अना की ख़ातिर तबादला करवाने वाले क़ाइदीन अपनी बक़ा का मूजिब बनने वाले मुस्लमानों के साथ होरहे ज़ुलम पर ख़ामोश क्यों हैं ? । शहर में पुलिस के मुखबिरों की सरगर्मीयों से परेशान शहरी मुखबिरों के नेट वर्क को मुस्लिम समाज के लिए एक नासूर तसव्वुर कररहे हैं जो समाज को तबाही के दहाने पर ले जा रहा है ।

TOPPOPULARRECENT