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बैंक में दूसरों की रक़ूमात प्रस्तुत करना महंगा पड़ेगा

हैदराबाद 12 नवंबर:शहरी खातों में दूसरों के रक़ूमात प्रस्तुत करते हुए उन्हें प्राप्त होने वाली गैस सब्सिडी से वंचित हो जाएंगे! भारत सरकार ने देश में 1000 और 500 रुपये के नोट का चलन बंद करने के साथ ही जो नियम लागू किए हैं उनके अनुसार 2.5 लाख तक की रक़ूमात बैंक खाते में जमा करवाई जा सकती हैं लेकिन उनके रक़ूमात से अधिक राशि जमा करवाने के मामले में इस राशि पर करों और कुछ मामलों में दंड भी लगाए जाएंगे।

लेकिन शातिर धनी वर्ग की ओर से इन गरीबों का शोषण किया जा रहा है जो खाते तो हैं लेकिन उनमें रक़ूमात नहीं होती और मासूम गरीब उनके खातों का उपयोग करने का अवसर प्रदान कर रहे हैं लेकिन उन्हें ऐसे किसी भी प्रक्रिया से पहले यह जान लेना चाहिए कि सरकार उन्हें गैस सब्सिडी इसलिए दे रही है क्योंकि वह स्तर गरीबी से नीचे जीवन बिता रहे हैं लेकिन अगर वे अपने खातों में बडी रक़ूमात प्रवेश करते हैं तो ऐसी स्थिति में खातादार के पास मौजूद राशि विवरण तो मयस्सर आजाएगी लेकिन खाते से जुड़ा आधार कार्ड और इसी से जुड़े गैस सब्सिडी मौलिक समाप्त कर दी जाए गी।

हुकुमत के सूत्रों के मुताबिक गैस सब्सिडी पाने वालों में करदाताओं की उपस्थिति की सूचना के बाद सरकार ने जनधन योजना के तहत बैंक खाते खुलवाये और उनके खातें को आधार और गैस कनेक्शन से जुड़ा दिया।

2014-15 के आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार की ओर से जन-धन योजना के तहत खातों की खुलेपन और उन्हें आधार कार्ड से कनेक्ट करने के प्रक्रिया के दौरान गैस सब्सिडी पाने वालों के वाक्यांश अनुपात में 24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और सरकार ने दावा किया था कि यह 24 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो गैस सब्सिडी प्राप्त करने के हकदार नहीं हैं बल्कि उनकी आय 10 लाख से अधिक हे। बताया जाता है कि सरकार अब 1000 और 500 की मुद्रा बदलने के दौरान भी ऐसे परिवारों की पहचान करेगी जिनके खातों में सालाना 10 लाख से अधिक जितनी रक़ूमात प्रस्तुत होने लगेंगी अगर ऐसा होता है तो सबसे पहले गैस सब्सिडी बंद कर दी जाएगी।

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