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बैरूनी मुल्कों को सऊदी अरब में तनख़्वाहों के ताय्युन का इख़तियार नहीं

रियाद 22 अक्टूबर । ( एजैंसीज़) सऊदी अरब में मुलाज़मतों में भरतीयों से मुताल्लिक़ क़ौमी कमेटी ने आज कहा है कि किसी भी मलिक को इस ममलकत में भर्ती किए जाने वाले वर्करों की उजरतों में इज़ाफ़ा करने का कोई इख़तियार नहीं होता ।

रियाद 22 अक्टूबर । ( एजैंसीज़) सऊदी अरब में मुलाज़मतों में भरतीयों से मुताल्लिक़ क़ौमी कमेटी ने आज कहा है कि किसी भी मलिक को इस ममलकत में भर्ती किए जाने वाले वर्करों की उजरतों में इज़ाफ़ा करने का कोई इख़तियार नहीं होता ।

इस कमेटी ने हकूमत-ए-हिन्द की इन ग़ैर मुसद्दिक़ा तजावीज़ पर तबसरा करते हुए कहा कि ये इत्तिलाआत मौसूल हुई हैं कि हकूमत-ए-हिन्द ने सऊदी अरब में कंट्टर एक्ट पर भर्ती किए जाने वाले हिंदूस्तानी ड्राईवरों केलिए भारी तनख़्वाह मुक़र्रर करने का फ़ैसला किया है ।

लेकिन इस कमेटी के चेयरमैन साद अलबदाह ने कहा कि क़ौमी कमेटी बैरूनी ममालिक से वर्कर्स की ताय्युनाती और उजरतों के ताय्युन के मुआमले में किसी भी मुदाख़िलत को क़बूल नहीं करती ।

ताहम उन्हों ने कहा कि हकूमत-ए-हिन्द से सरकारी तौर पर इस ज़िमन में ऐसी कोई तजवीज़ मौसूल नहीं हुई है जिस में ख़ानगी ड्राईवरों केलिए माहाना उजरत कम से कम 1200 रयाल मुक़र्रर करने की ख़ाहिश की गई है । उन्हों ने कहा कि सरकारी तौर पर तजवीज़ की वसूली के बाद ही कमेटी कोई जवाब दे सकती है ।

अगर हकूमत-ए-हिन्द अपने वर्कर्स की तनख़्वाहों में इज़ाफ़ा करने का इरादा रखती है तो हिंदूस्तानी सिफ़ारतख़ाने को चाहीए कि वो इस मसले पर सऊदी वज़ारत-ए-ख़ारजा से बातचीत करे ।

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