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बैलिस्टिक मिलाइल परिक्षण के बाद अमेरिका ने लगाए ईरान पर नए प्रतिबंध

ईरान की तरफ से हाल ही में बैलिस्टिक मिलाइल परिक्षण करने के बाद अमेरिका ने उस पर कुछ नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमरीका ने ईरान पर चरमपंथियों की मदद करने का आरोप लगाया है। बीबीसी के मुताबिक, ट्रंप सरकार ने 12 ईरानी कंपनियों और 13 गैर-ईरानी कंपनियों पर पर प्रतिबंध लगाया है।

इस प्रतिबंध के बाद ईरानी विदेशमंत्रालय ने शुक्रवार की रात को एक बयान जारी कर कहा है कि ईरान की मिसाइल क्षमता केवल रक्षा उद्देश्यों के लिए है और यह अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणापत्र के अनुसार ईरानी जनता के अधिकारों में शामिल है। इसके अलावा ईरान ने इसको सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 2231 के विपरीत बताया है।

वहीं, व्हाइट हाउस के तरफ से भी बयान जारी किया गया है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता सीन स्पाइसर ने कहा है कि इस कदम से यह साफ हो गया है कि ओबामा प्रशासन के साथ ईरान की जो परमाणु संधि हुई थी वो देशहित में नहीं थी। राष्ट्रपति ईरान को उसकी सीमा में रखना चाहते हैं।”

इससे पहले ट्रंप ने अपने ट्विटर पर ईरान को चेतावनी दी थी  कि ईरान आग से खेल रहा है और ओबामा प्रशासन ईरान के प्रति कितना उदार था वो इसका महत्व नहीं समझते। लेकिन मैं ऐसा नहीं हूं। वहीं ट्रंप के इस ट्वीट के बाद ईरान के विदेश मंत्री जावेज जरीफ ने ट्वीट किया था कि अमरीका पर खतरे से ईरान को कोई फर्क नहीं पड़ता। और वो कभी भी पहले युद्ध शुरू नहीं करेंगे। लेकिन हम अपनी सुरक्षा के लिए अपने बनाए हथियारों पर ही यकीन कर सकते हैं। उसके बाद उन्होंने एक अन्य ट्वीट किया था कि हम देखना चाहते हैं कि जो हमारी शिकायत कर रहे हैं वो भी यही बात कह सकें।

दूसरी तरफ न्यूयॉर्क के दौरे पर गए जर्मनी के विदेश मंत्री जिगमार गाब्रिएल ने कहा है कि ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण कर सुरक्षा परिषद प्रस्ताव का उल्लंघन किया है। लेकिन इससे परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय समझौते पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा, “ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का उल्लंघन किया है, इसलिए आप अमरीकी प्रतिक्रिया समझ सकते हैं। लेकिन ये बात स्पष्ट है कि परीक्षण का परमाणु समझौते पर कोई असर नहीं पड़ा है, और हम इस समझौते को लागू करने का समर्थन करते हैं, फिलहाल अमरीका भी इस समझौते पर सवाल नहीं उठा रहा है।”

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