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बॉलीवुड फिल्मों पर ‘मनसे’ द्वारा की जा रही राजनीति में घसीटे जाने पर सेना नाराज़

नई दिल्ली : बॉलीवुड फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ और पाकिस्तानी  कलाकारों के बॉलीवुड फिल्मों में काम करने को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) द्वारा की जा रही राजनीति में सेना को घसीटे जाने से कई सैन्य अधिकारी नाराज़ हैं |

मनसे ने मांग की है कि पाकिस्‍तानी कलाकारों को अपनी फिल्‍म में लेने वाले फ़िल्म निर्माताओं  को सेना कल्याण कोष में पांच करोड़ रुपये देने होंगे | हिंदुस्तान टाइम्स की एक खबर के मुताबिक़ सेना के कई अधिकारियों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि सेना एक ‘गैर राजनीतिक और धर्मनिरपेक्ष “संगठन है| अपनी फ़ायदे और राजनीति चमकाने के लिए सेना को ऐसे मामलों में नहीं घसीटा जाना चाहिए |

मनसे ने दिवाली पर रिलीज़ होने वाली करण जौहर की फिल्म को रोकने की धमकी दी थी | शनिवार को फिल्म निर्माता करण जौहर, प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष मुकेश भट्ट और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मनसे के साथ बैठक की थी | इस बैठक अपनी कुछ मांग मनवाए जाने के बाद मनसे ने फ़िल्म की रिलीज़ में बाधा नहीं डालने का फैसला लिया है | इन मांगों में फ़िल्म के प्रॉफिट का कुछ हिस्सा सेना कल्याण कोष में दिया जाना | पाकिस्‍तानी कलाकारों को अपनी फिल्‍म में लेने वाले फ़िल्म निर्माताओं को 5 करोड़ रूपये सेना कल्याण कोष में देना | भारत के प्रोड्यूसर्स गिल्ड द्वारा अपनी फिल्मों में किसी भी पाकिस्तानी कलाकार को नहीं लेना शामिल है |लेकिन जबरन वसूली का ये मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था |इस बात पर कई सैन्य अधिकारियों ने अपनी आपत्ति दर्ज करायी है |

पूर्व उत्तरी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बी एस जसवाल ने कहा, सेना को भीख की ज़रूरत नहीं है | फिल्म निर्माता जो दान करना चाहता है , वह एक भारतीय नागरिक की तरह कर सकता है । लेकिन इस तरह की मांग को बिलकुल नहीं स्वीकार किया जायेगा | जसवाल ने कहा कि यदि मामला बहुत संवेदनशील है तो सरकार इसमें क़दम उठाये | लेकिन सेना को इन सब से दूर रखा जाना चाहिए |

कारगिल युद्ध के हीरो ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर (सेवानिवृत्त) ने कहा कि राष्ट्रीय भावनाओं को इस तरह दोहन नहीं किया जाना चाहिए। किसी को 5 करोड़ रुपये का दान देने के लिए मजबूर करना बिलकुल भी सही नहीं है |सेना मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कोई भी अपनी मर्ज़ी से कोष में योगदान कर सकते है | लेकिन लोगों को दान करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते, सेना इस तरह का पैसा नहीं  चाहती है |

शिवसेना का विरोध प्रदर्शन पिछले महीने जम्मू-कश्मीर में एक आतंकवादी हमले में 19 सैनिकों के मारे जाने के बाद शुरू हुआ था | भारत ने पाकिस्तान को इसका दोषी मानते हुए कहा था कि पाकिस्तान आतंकवादियों को अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए पनाह देता है |

पिछले दिनों युद्ध में हताहत हुए सैनिकों के परिवारों के मदद के लिए कई लोगों और संगठनों ने रक्षा मंत्रालय से संपर्क किया था | जिसके बाद सेना कल्याण कोष की शुरुआत की गयी थी | रक्षा मंत्रालय ने 17 अक्टूबर को एक विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा था कि इसमें कोई भी स्वेच्छा से योगदान कर सकता है |

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