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बोडो इलाक़े के साकिनों ने बंगला देशी होने की तरदीद करदी

बंगला देशी होने पर इख़राज हुकूमत का काम बोडो क़बाइलीयों का नहीं

बंगला देशी होने पर इख़राज हुकूमत का काम बोडो क़बाइलीयों का नहीं

रूमीला ख़ातून ने बाज़ बोडो ग्रुप्स के इस दावे पर कि बोडोलैंड इलाक़े में रहने वाले मुसलमान पड़ोसी मुल्क के शहरी हैं कहा कि मेरी शादी 29साल क़बल इसी देहात में हुई थी कोईभी मुझे बंगला देशी कैसे कह सकता है। आसामी ज़बान में रवानी से बातचीत करते हुए दो लड़कों की 45साला माँ ने कहा कि इस के पास नारायण गढ़ी देहात अंडा का अराज़ी पट्टा था और तमाम कारआमद दस्तावेज़ात थे जिन्हें दहशतगरदों ने 2मई को ज़िला बक्सा पर हमले के दौरान उनके मकानों के साथ जला दिया।

रूमीला के 26साला फ़र्ज़ंद शफ़ीक़ुल-इस्लाम ने कहा कि वो इसी देहात में पैदा हुआ उसे उम्मीद है कि अब भी कुछ दस्तावेज़ात बच गए हैं। वो मुताल्लिक़ा ओहदेदार से दरख़ास्त करता है कि वो इसके अराज़ी हुक़ूक़ का पता चलाए । मुतास्सिरा देहात नारायण गढ़ी के बेशतर अवाम अराज़ी के हुक़ूक़ रखते हैं।

कोकराझार और बक्सा अज़ला पर एक‌ मई से दो दिन तक हमले जारी रहे बाज़ ग्रुप्स ने दावा किया कि ये लोग बंगला देश से गै़रक़ानूनी दरअंदाज़ी कर के यहां दाख़िल हुए हैं इनका इख़राज ज़रूरी है। ताहम अक्सर लोग इस नज़रिया से मुत्तफ़िक़ नहीं है। इनका कहना है कि अगर वो बंगला देशी तारकीन-ए-वतन हैं तब भी ये हुकूमत का काम है कि वो हमें वापिस भिजवा दे।

बोडो क़बाइलीयों को कोई हक़ नहीं कि हमारी औरतों और बच्चों को क़तल करें और हमारी जायदादें नज़र-ए-आतिश करें। ख़ातून का ख़ानदान दो बेटों एक बहू और दो पवित्रतों पर मुश्तमिल हैं। ये इन पाँच ख़ानदानों में से एक है जो इस फ़साद में हलाक होने से बच गए। ख़ानदान के तमाम 6अरकान अब भंगुर पर बाज़ार के राहत रसानी कैंम्प में मुक़ीम हैं।

इस कैंम्प में रहने वाले अफ़राद नारायण गढ़ी देहात से ताल्लुक़ रखते हैं और ये देहात 2004 से पहले ख़ानदानों का वतन था जब कि दरयाए बैकी ने अपना रास्ता बदल दिया । एक तबाहकुन सेलाब आया और बेशतर इलाक़ा ज़ेर-ए-आब आगया। इस के बाद तक़रीबन 75ख़ानदान दरयाए के मग़रिबी किनारे पर मुक़ीम होगए।

दरयाए बैकी अब बेशतर मियादी पट्टा अराज़ी पर बह रही है और पूरी अराज़ी पर दरिया ने क़बज़ा करलिया है। इसके बावजूद ये ख़ानदान क़रीब में ही मुक़ीम रहे वो दरिया के दूसरे किनारे पर अशिया-ए-ज़रुरीया के ख़ातिर इन्हिसार करते हैं। फ़साद में एक शख़्स अली की बीवी हलाक करदी गई। इसका कहना है कि इस के पास 30साल क़दीम अराज़ी का पट्टा है इस के बेटे और पोतरे की शादी यही हुई थी फिर भी हमें बंगला देशी क़रार दिया जाता है|

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