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बोफोर्स दलाल क्वात्रोची का इंतेकाल

नई दिल्ली, 13 जुलाई: हिंदुस्तान की सियासत में भूचाल लाने वाले बोफोर्स दलाली मामले के मुल्ज़िम ओटावियो क्वात्रोची का दिल का दौरा पड़ने से इटली के मिलान शहर में इंतेकाल हो गया। 72 साला क्वात्रोची को गांधी खानदान का करीबी माना जाता था।

नई दिल्ली, 13 जुलाई: हिंदुस्तान की सियासत में भूचाल लाने वाले बोफोर्स दलाली मामले के मुल्ज़िम ओटावियो क्वात्रोची का दिल का दौरा पड़ने से इटली के मिलान शहर में इंतेकाल हो गया। 72 साला क्वात्रोची को गांधी खानदान का करीबी माना जाता था। वह हिंदुस्तान में इतालवी कंपनी स्नैम प्रोगति के नुमाइंदे के तौर पर फआल था।

बोफोर्स तोप सौदे की दलाली में नाम आने के बाद क्वात्रोची रातों-रात नई दिल्ली से फरार हो गया था। माना जाता है कि वह हुकूमत की शह से ही फरार होने में कामयाब रहा था। हालांकि, 2007 में उसे अर्जेटीना में गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन ज़्यादा कोशिशों के बावजूद सीबीआइ को उसके हवालगी में कामयाबी हाथ नहीं लग सकी।

क्वात्रोची रह-रहकर सुर्खियो में आता रहा। यूपीए हुकूमत के पहले दौर ए इक्तेदार में उसे लेकर तब सियासी तूफान खड़ा हो गया था, जब यह बात सामने आई कि हुकूमत ए हिंद ने लंदन वाकेए उसके बैंक खातों पर लगी रोक हटा दी है। हालांकि, हुकूमत ए हिंद ने इस मामले की जांच कराने की बात कही, लेकिन आखिरकार मामला रफा-दफा हो गया।

यूपीए हुकूमत के दूसरे दौर ए इक्तेदार में सीबीआइ ने उस पर लगे इल्ज़ामात वापस ले लिए और एक तरह से उसे क्लीनचिट मिल गई। हिंदुस्तान ने स्वीडन की बोफोर्स कंपनी से होवित्जर तोपें खरीदी थीं। तब राजीव गांधी वज़ीर ए आज़म थे। इल्ज़ाम है कि 1437 करोड़ रुपये के इस सौदे के लिए तकरीबन 64 करोड़ रुपये की दलाली दी गई थी।

इन्हीं इल्ज़ामात की वजह से 1989 में राजीव गांधी की हुकूमत को इक्तेदार से बेदखल होना पड़ा था।

सीबीआई ने 1999 में साबिक दिफा सेक्रेटरी एसके भटनागर, ओटावियो क्वात्रोची, विन चड्ढा और बोफोर्स के साबिक चीफ मार्टिन आर्डबो व कंपनी के खिलाफ चार्जशीट दायर किया था। इनमें एसके भटनागर, मार्टिन आर्डबो और विन चड्ढा का पहले ही इ‍ंतेकाल हो चुका है।

बोफोर्स मामले के मुल्ज़िम क्वात्रोची को कभी भी हिंदुस्तान की किसी अदालत में पेश नहीं किया जा सका।

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