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बोर्ड इम्तिहान : बिहार में खुले आम नक़ल

बिहार में मंगल को 10वीं की इम्तिहान शुरू हुई। कई जिलों से बड़े पैमाने पर खुलेआम नकल की खबरें आने की वजह से यह इम्तिहान चर्चा में है। मुक़ामी अखबारों के पहले पन्ने पर जान हथेली पर लेकर नकल में मदद करते गार्जियन की तस्वीरें शाया हुयी ह

बिहार में मंगल को 10वीं की इम्तिहान शुरू हुई। कई जिलों से बड़े पैमाने पर खुलेआम नकल की खबरें आने की वजह से यह इम्तिहान चर्चा में है। मुक़ामी अखबारों के पहले पन्ने पर जान हथेली पर लेकर नकल में मदद करते गार्जियन की तस्वीरें शाया हुयी हैं। अखबार चैनलों में नकल करवाने की छूट देने के बदले इम्तिहान सेंटरों पर तैनात पुलिस को घूस लेते हुए दिखाया गया है। इम्तिहान का इंकाद बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बीएसईबी) कराती है।

इम्तिहान में सरकारी और सरकारी मंजूरी हासिल स्कूलों के 14 लाख से ज़्यादा तालिबे इल्म इंतिहान में शामिल हो रहे हैं। इम्तिहान 24 मार्च तक चलेगी। बीएसईबी के मुताबिक रियासत भर में पहले दो दिनों में 400 से ज़्यादा इम्तिहान देने वाले तालिबे इल्म को इम्तिहान देने के लिए रोक दिया गया। जबकि पहले दिन अंग्रेजी की इम्तिहान हुई जिसके पॉइंट्स नतीजे में नहीं जुड़ते। अंग्रेजी सबजेक्ट में सिर्फ इम्तिहान में शामिल होना जरूरी है। इसके बावजूद इस सबजेक्ट में भी तालिबे इल्म नकल करने से बाज नहीं आए और पहले ही दिन 300 से ज़्यादा तालिबे इल्म निकाले गए। बीएसईबी का कहना है कि उसने नकल रोकने के लिए सख्त हिदायत दे रखे हैं। इम्तिहान सेंटर की वीडियोग्राफी की इंतेजाम से लेकर छापामार जांच के लिए उड़न दस्ते भी घूमते हैं।

इस सबके दरमियान बड़े पैमाने पर हो रही नकल के लिए बीएसईबी के सदर प्रोफेसर लालकेश्वर प्रसाद सिंह जिला इंतेजामिया को जिम्मेदार मानते हैं। वहीं प्रोफेसर विनय कंठ का मानना है कि बड़े पैमाने पर हो रही नकल की कई वजहें हैं। विनय कंठ हाईस्कूल सतह पर पढ़ाई के सतह में गिरावट, एडमिशन से लेकर नौकरी पाने तक में मार्क्स का अहम रोल बने रहने और सामाजिक तौर से नकल को बुरा नहीं मानने को इसकी बड़ी वजह मानते हैं।

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